पुलिसिंग का हाल:21 में से 17 थानों में महिला विवेचक नहीं पीड़िताें को बयान देने में भी आती है शर्म

- महिला संबंधी अपराधों में हर तरह की जांच पुरुष अफसर कर रहे
- नियम: महिलाओं से अपराध पर महिला टीआई, एसआई, एएसआई को जांच करना है
महिला संबंधी अपराधों को लेकर जिले में पुलिस प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा थानों में महिला स्टाफ की गैरमौजूदगी से लगाया जा सकता है। जिले के थानों में दर्ज अपराध और विवेचकों के आंकड़ों की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
यहां 21 में से 17 थानों में महिला संबंधी अपराधों की विवेचना के लिए जांच अधिकारी ही नहीं है। वहीं 5 थाने व चौकी तो ऐसे हैं, जहां महिला सिपाही तक नहीं। बड़ी बात यह है कि इन्हीं थानों में महिलाओं से जुड़े केस सबसे ज्यादा आते रहे हैं।
जब कोई मामला आता है तो एफआईआर दर्ज करने दूसरी जगहों पर पदस्थ महिला अफसरों को बुला लिया जाता है, लेकिन मामले की जांच पुरुष अधिकारियों को ही महिला आरक्षक की मदद से करना पड़ता है। नतीजा पीड़ित महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं कह पातीं। शारीरिक शोषण का शिकार होने पर उन्हें आपबीती बताने में शर्म तक महसूस होती है। विवेचना के लिए भी पीड़ितों को महिला अधिकारी के आने तक इंतजार करना पड़ता है।
महिला विवेचकों की तैनाती का हाल
जिले में सिर्फ 4 महिला टीआई हैं। इनमें से 1 थानेदार यातायात में पदस्थ है। 21 थानों समेत अन्य 37 यूनिट में 4 एसआई, 6 एएसआई, 16 प्रधान आरक्षक और 173 महिला आरक्षकों की तैनाती है। सबसे ज्यादा आरक्षक कंट्रोल रुम, पुलिस लाइन में
जिन थानों में अपराध ज्यादा वहीं परेशानी
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि जिन थानों में महिला संबंधी अपराध ज्यादा हैं, वहीं महिला विवेचकों की संख्या न के बराबर है। 10 बड़े थानों में एेसी स्थिति है। जबकि इन थानों में पिछले छह महीने में महिलाओं से जुड़े करीब 172 मामले रजिस्टर्ड हुए हैं।
एक्सपर्ट से जानिए ऐसा है पूरा नियम
अधिवक्ता राजकुमार तिवारी के मुताबिक नाबालिगों के साथ उत्पीड़न के मामले में कोर्ट के नियमानुसार महिला थाना प्रभारी, एसआई,एएसआई द्वारा विवेचना की जानी चाहिए। वयस्क महिला से दुष्कर्म के मामले में भी कम से कम महिला एएसआई जरूरी है।
महिला विवेचकों की पोस्टिंग करेंगे
महिला संबंधी अपराधों की विवेचना और सुनवाई के लिए नए सिरे से प्लानिंग करेंगे। महिला विवेचकों की पोस्टिंग की जाएगी। 3 से 4 थानों के बीच में एक महिला अधिकारी को नोडल बनाकर व्यवस्था करेंगे।
प्रशांत अग्रवाल, एसपी, दुर्ग



