मॉनिटरिंग:प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रदूषित है केलो नदी के 15 किमी का हिस्सा

- केलो नदी में पर्यावरण संरक्षण मंडल लगवाएगा दो मशीन, पानी में प्रदूषण के स्तर की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग
जीवनदायिनी कही जाने वाली केलो नदी प्रदेश की पांच प्रमुख नदियों में सबसे प्रदूषित है। क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल के हिसाब से शहर और आसपास 15 किलोमीटर के दायरे में नदी का पानी उपयोग के लायक नहीं है। नदी में प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए अप और डाउन स्ट्रीम में 42 लाख रुपए की मशीन लगाई जा रही है ताकि प्रदूषण की स्थिति देखी जा सके।
केलो नदी का पानी निस्तारी के योग्य भी नहीं है। बड़े नालों के गंदे पानी और प्रदूषण के कारण हर महीने केलो नदी की रिपोर्ट में प्रदूषण बढ़ा हुआ दिखता है। वाटर क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट में खराब है। नालों और कुछ स्थानों में फैक्ट्री का गंदा पानी नदी में प्रवाहित होने के कारण शीशे (लेड) की मात्रा भी ज्यादा है।
लेकिन इसकी नियमित जांच नहीं होती है। शहर के 12 बड़े नालों से हर रोज लाखों लीटर पानी आकर केलो नदी को दूषित कर रहा है। रायगढ़ से कनकतुरा के बीच की 15 किलोमीटर तक सर्वे किया गया। इसमें शहर के बीच वाले हिस्से को सबसे ज्यादा दूषित बताया गया था। शहर की बड़ी आबादी को निगम के फिल्टर प्लांट से केलो नदी का पानी भेजा जाता है। हर दिन हजारों लोग निस्तारी के लिए उपयोग करते हैं, इस वजह से शासन अब केलो नदी की मॉनिटरिंग को लेकर गंभीर है।
जलीय जीवों पर बुरा प्रभाव
लगभग संस्था ने केलो नदी का सर्वे कर एक रिपोर्ट पर्यावरण विभाग में जमा की थी। केलो नदी के पानी में कॉलीफार्म बैक्टीरिया का स्तर चिंताजनक स्तर तक बताया गया है। सामान्य स्थिति में इस बैक्टीरिया का स्तर प्रति 100 मिली 3 तक ही होना चाहिए लेकिन रिपोर्ट के अनुसार डाउन स्ट्रीम में यह 97 से 120 तक है । 40 गुना ज्यादा प्रदूषण के कारण मछलियां एवं दूसरे जलीय जीव नदी में नहीं रह गए हैं। पहले कुछ रिपोर्ट में पीएच वेल्यू 7 से कम यानि पानी अम्लीय पाया गया। अब पीएच वेल्यू को 7.5 से 8.5 बता रहे हैं, यह मात्रा सामान्य है।
कॉलिफॉर्म (एफसी) और कार्बन (टीसी) की मात्रा ज्यादा
नदी बीओ बीओडी एफसी टीसी महानदी 7.2 3.1 4 17 केलो अपस्ट्रीम 7 3.3 9.3 27 केलो डाउनस्ट्रीम 6.9 3.7 13 43 (नोट; यह रिपोर्ट नवंबर 2020 में हुई जांच की है )
एसटीपी की रफ्तार धीमी
नगर निगम केलो को सुरक्षित रखने लगभग 68 करोड़ के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। लेकिन रफ्तार धीमी है। अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है। मरीन ड्राइव वाले हिस्से में चार महीने से काम अटका हुआ है।
गर्मी में खराब रहता है पानी
ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए दो मशीनें केलो के अप-डाउन स्ट्रीम में लगाई जाएंगी। गर्मी के दिनों में पानी कम होने और नालों का पानी नदी में गिरने के कारण प्रदूषण होता है। अभी नदी का पानी ठीक है, घुलित ऑक्सीजन 7 मिलीग्राम प्रति लीटर है, खतरनाक तत्व नहीं हैं।”
सतीश वर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण विभाग



