दन्तेवाड़ा जिला

दंतेवाड़ा की बेटी बनी महासमुंद की SDM:आसान नहीं थी नम्रता के लिए IAS बनने की राह, दो चाचा की असमय मौत ने झकझोरा तब भी नहीं हारी हिम्मत, पहले IPS फिर IAS बन दिखाया

दंतेवाड़ा जैसे नक्सलगढ़ जिले की बेटी IAS नम्रता जैन अब महासमुंद की SDM होंगी। जैसे ही इसकी खबर जिले में फैली,लोगों में काफी खुशी देखने को मिल रही है। नम्रता जैन के लिए इस IAS बनने का अपना सपना पूरा करना आसान नहीं था। एक के बाद एक चुनौतियां नम्रता के सामने आकर खड़ी हुई, लेकिन फिर भी इन्होंने हार नहीं मानी।

पढ़ाई में मां का सपोर्ट मिला
नम्रता की पढ़ाई दंतेवाड़ा के कारली के निर्मल निकेतन स्कूल से हुई है। 10वीं के बाद जब आगे की पढ़ाई की बारी आई तो परिजनों ने बाहर भेजने से पहले मना किया था। मां किरण ने बताया कि मैंने बेटी का पूरा समर्थन किया। घर वाले राजी हो गए। आगे भिलाई में 5 व दिल्ली में 3 साल से घर से दूर रहकर पढ़ाई की। चाचा और मामा ने IAS की पढ़ाई के लिए सबसे ज्यादा प्रोत्साहित कर दिल्ली भेजा। जहां कड़ी मेहनत कर नम्रता ने अपना सपना साकार किया।

99वां रैंक लाने के बाद भी IAS बनने से चुकी थीं
2016 में UPSC की परीक्षा में 99 वा रैंक लाने के बाद भी नम्रता IAS बनने से चूक गई थीं। मध्यप्रदेश कैडर की IPS अफसर बनी। नम्रता का लक्ष्य IAS बनना था, इसलिए उसने अपना प्रयास जारी रखा। एक साल अवकाश लेकर फिर से तैयारी में जुट गई व अपना पूरा समय पढ़ाई पर दिया। इस बीच तात्कालिक कलेक्टर सौरभ कुमार व तात्कालिक सीईओ डॉ. गौरव सिंह का भी लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा।

नहीं मानी हार, कड़ी मेहनत की और बन गईं IAS
नम्रता एक बार फिर से UPSC परीक्षा की तैयारियों में जुटी। IAS बनने का सपना पूरा करने के लिए न दिन देखा और न रात। सिर्फ परीक्षा की तैयारियां करती गईं। अपनी कड़ी मेहनत से नम्रता जैन में देशभर में 12वां रैंक भी प्राप्त कर लिया। नम्रता के चाचा सुरेश जैन ने बताया कि नम्रता का सपना IAS बनने का था, उसने हार नहीं मानी, पढ़ाई जारी रखी और आज उसने सब कुछ कर दिखाया।

दो चाचा की मौत ने झकझोरा, लेकिन हौसला नहीं हुआ कम
नम्रता के परिजनों ने बताया कि जिस वक्त IAS की कोचिंग कर रही थी उस वक्त 6 महीने के अंतराल में दो चाचा की मौत हो गई। पहले बड़े चाचा अमृत जैन की हार्टअटैक से तो इसके ठीक 6 महीने बाद छोटे चाचा संतोष जैन की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। इस घटना ने नम्रता को झकझोर दिया। इतना ही नहीं परीक्षा के 15 दिन पहले 1 महीने तक बीमार भी रही। लेकिन अपना हौसला कम नहीं होने दिया। परिजनों के अनुसार दोनों चाचा का सपना था कि नम्रता IAS बनीं।

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