दुर्ग जिला

सबसे बड़े कोरोना योद्धा:जिले के 379 डॉक्टरों ने हमें बचाने ड्यूटी टाइम से अलग, 1 लाख से ज्यादा घंटे अतिरिक्त दिए

  • कोरोना नहीं हारता अगर ये संवेदनशील नहीं होते, हर मोर्चे पर इन्होंने अतिरिक्त देने की कोशिश की, जिले में 64 हजार से ज्यादा की जान बची

कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की जान बचाने के लिए जिले 379 डॉक्टरों ने 480 घंटे ज्यादा काम किया है। इनके इस सतत प्रयासों से बीते 4 माह के दौरान कोरोना की चपेट में आने वाले कुल 65331 लोगों में से 64145 की जान बचाई जा सकी। पब्लिक सेवा में आज भी खई डॉक्टर अब भी मैदान में डटे हुए हैं।

मार्च 2020 से शुरू हुई पहली लहर में सबने कोरोना का डटकर मुकाबला किया था, अब भी विश्वव्यापी बीमारी से जारी जंग में डटे हैं। इसमें जिले के 35 निजी और 3 सरकारी कोविड अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टर प्रत्यक्ष तौर पर शामिल हैं। सबने 120 दिनों में रोज औसतन 4 घंटे अतिरिक्त सेवाएं दी हैं। 100 से ज्यादा ऐसे डॉक्टर हैं, जो फील्ड पर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान दिया। इन डॉक्टर्स में डॉ. बीके साव, डॉ. एसके पॉल व डॉ. राजेंद्र जैन को जान तक गंवानी पड़ी।

उन 3 डॉक्टरों को जानिए, जिन्होंने कोरोना की रफ्तार रोकने में अहम जिम्मेदारी निभाई, घर से लेकर दफ्तर तक हर मोर्चे पर रहे तैनात

1. टेस्टिंग- 5 लाख से भी ज्यादा सैंपल कलेक्ट कराया, अपनी टीम के साथ पूरे समय डटे रहे

कोरोना रोकथाम के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के जांच की जिम्मेदारी डॉ. आरके खंडेलवाल को दी गई। उनके नेतृत्व 200 से ज्यादा लैब टैक्निशयन अब तक 5 लाख से ज्यादा सैंपल कलेक्ट किए हैं। जबसे यह जिम्मेदारी मिली है, सभी सरकारी अस्पतालों में पूरे समय टीम के साथ सैंपल लेने में डटे हैं। रेलवे स्टेशन अन्य पब्लिक प्लेस पर आन-स्पॉट सैंपल लेने का काम भी करा रहें हैं।

2. ट्रीटमेंट- 2300 संक्रमितों की मॉनीटरिंग की उनमें से 1989 मरीजों को स्वस्थ कर भेजा घर

कोरोना की दूसरी लहर में 65331 लोग संक्रमित हुए। इसमें से 7000 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। 2300 लोग सरकारी कोविड अस्पताल कचांदुर में भर्ती हुए। जिनकी रेगुलर निगरानी डॉ. अनिल शुक्ला द्वारा की गई। उनके नेतृत्व में 44 डॉक्टरों की टीम ने 1989 की जान बचाया। 176 मरीजों को समय रहते हॉयर सेंटर रेफर किया, उनमें ज्यादातर ठीक हो गए।

3. टीकाकरण- रिटायर होने से पहले साढ़े चार लाख से ज्यादा लोंगों को पहली डोज लगवाई

कोरोना रोकथाम की तीसरी बड़ी जिम्मेदारी ज्यादा से ज्यादा लोगों के टीकाकरण की थी। इसकी जिम्मेदारी जिला टीकाकरण अधिकारी पद पर रहे डॉ. सुदामा चंद्राकर को दी गई थी। उन्होंने पहले दिन से ही इसके लिए लोगों को प्रेरित किया। हेल्थ वर्करों के टीकाकरण से मुहिम छेड़ी 18 प्लस की शुरूआत तक डटे रहे। मई में सेवानिवृत्त होने से पहले तक 460887 लोगों को पहली डोज लगवा दिए।

379 डॉक्टरों ने लड़ी जंग, तब स्थिति नियंत्रण में आई

कोरोना की दूसरी लहर में जिले के 379 निजी व सरकारी डॉक्टरों ने जंग लड़ी है। इनके बुलंद हौसलों से हमने 65000 से ज्यादा संक्रमितों में 64000 की जान बचाई है। इस जंग में कुछ ने प्रत्यक्ष तौर पर तो कुछ ने परोक्ष रूप में अहम भूमिका अदा की है। सभी ने अद्वितीय योगदान दिया है।

-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ दुर्ग

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