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मराठा समुदाय के लिए बड़ी सौगात:आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और नौकरी में मिलेगा 10 प्रतिशत का आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण देने लगाई थी रोक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण रद्द किए जाने से नाराज चल रहे मराठा समुदाय के लिए सोमवार को अच्छी खबर सामने आई है। उद्धव सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर( ईडब्ल्यूएस) छात्रों और अभियार्थियों को 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का ऐलान किया है।

इस संबंध में सोमवार को जारी आदेश जारी में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर मराठा समुदाय के युवाओं को शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। साथ ही सीधी सेवा भर्ती में यह मराठा उम्मीदवार इस आरक्षण का 10 प्रतिशत लाभ उठा सकेगा।

इससे पहले सरकार ने फैसला किया था कि जब तक राज्य में मराठा आरक्षण लागू नहीं हो जाता, तब तक मराठा समुदाय 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकता। लेकिन, अब पहले के फैसले को उलट कर ईडब्ल्यूएस के लिए इसे लागू कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आर्थिक रूप से कमजोर नहीं मराठा समुदाय

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मिले आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था। यह आरक्षण आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया था। कोर्ट ने बुधवार को दिए फैसले में कहा कि 50% आरक्षण की सीमा तय करने वाले फैसले पर फिर से विचार की जरूरत नहीं है। मराठा आरक्षण 50% सीमा का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें

1. मराठा समुदाय के लोगों को रिजर्वेशन देने के लिए उन्हें शैक्षणिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ा वर्ग नहीं कहा जा सकता। मराठा रिजर्वेशन लागू करते वक्त 50% की लिमिट को तोड़ने का कोई संवैधानिक आधार नहीं था।

2. इंदिरा साहनी मामले में फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र में कोई आपात स्थिति नहीं थी कि मराठा आरक्षण जरूरी हो। मराठा कोटे के तहत PG मेडिकल में 9 सितंबर 2020 तक हुए एडमिशन पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा।

3. राज्यों को यह अधिकार नहीं कि वे किसी जाति को सामाजिक-आर्थिक पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लें। राज्य सिर्फ ऐसी जातियों की पहचान कर केंद्र से सिफारिश कर सकते हैं। राष्ट्रपति उस जाति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देशों के मुताबिक सामाजिक आर्थिक पिछड़ा वर्ग की लिस्ट में जोड़ सकते हैं।

क्या है पूरा मामला

2018 में उस वक्त की महाराष्ट्र सरकार ने मराठा वर्ग को सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा में 16% आरक्षण दिया था। इसके पीछे जस्टिस एनजी गायकवाड़ की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया था। OBC जातियों को दिए गए 27% आरक्षण से अलग दिए गए मराठा आरक्षण से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लंघन हुआ, जिसमें आरक्षण की सीमा अधिकतम 50% ही रखने को कहा गया था।

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