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लेखपाल दीपक ठाकुर को नही मिली मनवांछित दाम,तो रोक दी बैगा कर्मचारी का एरियस भुगतान। अब होगी जिला अस्पताल से हटाकर जाँच।

दीपक ठाकुर व्हाट्सएप ग्रुप में निकाल रहे अपनी भड़ास।

पड़े क्या है पूरा मामला:-

कवर्धा:-जिला अस्पताल कवर्धा के लेखपाल दीपक ठाकुर के कारनामे इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है। अपने कारनामो के लगातार मीडिया में आने से दीपक ठाकुर बेचैनी महसूस कर रहे है। जो वाट्सएप ग्रुप में नजर आ रहा है। अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी बैगा कर्मचारी अर्जुन बैगा ने इंक्रीमेंट कार्य के लिए दीपक ठाकुर को 10 हजार रूपये दिया है। इसी का एरियस बनाने के लिए 10 प्रतिशत की और मांग किया है , मनचाहा घुस नही मिला तो एरियस भुगतान रोककर कर्मचारी को प्रताड़ित कर रहे है। मामला मीडिया में आया, जो फारवर्ड होते – होते जिला अस्पताल कवर्धा के DH कर्मचारी संगवारी व्हाट्सएप ग्रुप में पहुंचा ।
जहाँ दीपक ठाकुर ने टिप्पणी कर मीडिया को बताने कहा, कि अर्जुन बैगा जी वर्ष 2012 से 2016 तक 782 दिन अनधिकृत अनुपस्थिति रहे है जिसके निराकरण के लिए उच्च अधिकारी को पत्र प्रेषित किया गया है। साथ ही सत्य कड़वा होता है बताते हुए, अर्जुन बैगा को अपने किसी नजदीकी सर से सम्पर्क करने परामर्श भी दिया गया।
सम्भवतः दीपक ठाकुर टिप्पणी करते ये भूल गए थे कि उन्होंने अर्जुन बैगा का दिनाक 02/08/2019 को वर्ष 2011 से 2019 तक के लगातार वेतनवृद्धि स्वीकृति आदेश जारी करवा चुके है। ऐसे में लम्बित अवकाश के निराकरण की बात कहना अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान हैं।

क्या कहता है नियम और CG09 न्यूज़ चैनल की पड़ताल:-

CG09 न्यूज़ को जानकर सूत्रों से पतासाजी पर जानकारी मिली कि शासकीय सेवक, वेतनवृद्धि देय वर्ष के दौरान लगातार एक वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण करता है,तभी उसे उस वर्ष का वेतन वृद्धि स्वीकृति किया जाता है।

वेतनवृद्धि नियम के प्रकाश में और व्हाट्सएप ग्रुप में दीपक ठाकुर के टिप्पणी की नजर से अर्जुन बैगा के आरोप को देखे तो उनका दीपक ठाकुर को इंक्रीमेंट कार्य के लिए 10 हजार देने के आरोप के पुख्ता होने की ओर इशारा जरूर करता है। ऐसे में यह क़यास लगाए जा रहे है कि, यदि एरियस बनाने के लिए 10 प्रतिशत की नजायज मांग पूरा हो जाता तो, जैसे अनधिकृत अनुपस्थिति रहते वेतनवृद्धि स्वीकृति कर दिया गया वैसे ही बिना किसी अड़चन के एरियस निकाल दिया जाता। खैर इसका सही खुलासा तो एक विस्तृत जाँच के बाद ही हो सकता है।

कर्मचारियों ने दीपक ठाकुर को जिला अस्पताल से हटाकर जाँच की मांग की है। दीपक ठाकुर लेखपाल पद पर शोभायमान है, कार्यालय के बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज लेखपाल के प्रभार में होता है। हालिया दीपक ठाकुर के ऊपर फर्जी बिलो से जी एस टी चोरी, फर्मो का भुगतान चेक अपने नाम से काटने का, कम्प्यूटर में हिंदी टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण किये बिना वेतनवृद्धि लेने का स-प्रमाण आरोप लगा है। अब अस्पताल के कर्मचारि लैब टेक्नोलॉजीईस्ट ममता बागड़े ने दीपक ठाकुर के ऊपर चाय-पानी खर्चा नही देने के कारण षड्यंत्र कर अनाधिकृत रूप से Dies-non, अकार्य दिवस करवाने का तो वही अर्जुन बैग ने इंक्रीमेंट एरियस भुगतान के लिए दस प्रतिशत हिस्सा नही देने के कारण भुगतान रोकवाने का आरोप लगाया हैं।

दीपक ठाकुर के पद और प्रभाव को देखे तो निष्पक्ष जांच के लिए दीपक ठाकुर को जिला अस्पताल से हटाये जाने की मांग जायज लगता। वैसे भी जिस कर्मचारी के खिलाफ जाँच हो और उसी कर्मचारी के प्रभार में जाँच के दस्तावेज हो तो ऐसे में निष्पक्ष जांच की बात सहसा बेमानी लगता है।

अर्जुन बैगा का अवकाश निराकरण के लिए प्रस्ताव आया है। नियम तो ऐसा नही बोलता, रिश्वत लिये और अवकाश अवधि लम्बित रहते इंक्रीमेंट लगा दी जाए। बहुत जल्द दीपक ठाकुर को जिला अस्पताल से अन्यत्र हटाकर ही निष्पक्ष जांच करवाया जावेगा।

डॉ एस के मण्डल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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