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दीनदयाल जी के पुण्यतिथि को भाजपा ने मनाया समर्पण दिवस के रूप में

कवर्धा । एकात्म मानववाद के प्रणेता , महान विचारक , लेखक, जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि समर्पण दिवस पर आज भाजपा कार्यालय में दीनदयाल उपाध्याय के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित व दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई व राजनीति में उनके योगदान को याद किया गया।

भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने दीनदयाल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक महान विचारक और एक राजनेता थे और भारतीय जनसंघ पार्टी को बनाने में इनका अहम योगदान रहा है. इन्होंने अपनी कॉलेज के दिनों में ही राजनीति में आने का निर्णय ले लिया था और बेहद ही कम समय में इन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कर ली थी.साल 1951 में भारतीय जनसंघ की नींव रखी गई थी और इस पार्टी को बनाने का पूरा कार्य इन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर किया था. इस पार्टी के गठन के बाद दीनदयाल जी को इस पार्टी का महासचिव भी चुना गया था और ये पार्टी आरएसएस से जुड़ी हुई थी जो राष्ट्रवाद की विचारधारा रखती थी. वहीं सन् 1977 में ये पार्टी, जनता पार्टी के नाम से प्रसिद्ध हो गई थी और साल 1980 में इस पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी हो गया था.

भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि भारत की राजनीति आज जिस स्तर पर है उसे बनाने के पीछे कई महान लोगों का योगदान रहा है और इन्ही महान लोगों में से एक दीनदयाल उपाध्याय जी भी थे. जिन्होंने हमारे देश को एक मजबूत राजनीतिक पार्टी देने का कार्य किया ।

भाजपा प्रदेश मंत्री विजय शर्मा ने महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा जीवनपर्यंन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा को अत्यधिक महत्त्व देते हुए उस पर सदा आरूढ़ रहने वाले भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनता पार्टी के लिए न केवल वैचारिक मार्गदर्शन और नैतिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं, बल्कि देश के अन्यतम राष्ट्रवादी राजनीतिज्ञ और भारतीय राष्ट्रवादी राजनीति के पुरोधा भी थे। पंडित दीनदयाल मज़हब और संप्रदाय के आधार पर भारतीय संस्कृति का विभाजन करने वालों को देश के विभाजन का ज़िम्मेदार मानते थे। राष्ट्र के सजग प्रहरी व सच्चे राष्ट्र भक्त के रूप में भारतवासियों के प्रेरणास्त्रोत रहे पण्डित दीनदयाल के जीवन का उद्देश्य- अपने राष्ट्र भारत को सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक आदि समस्त क्षेत्रों में उतुंग उचाईयों पर अर्थात बुलंदियों तक पहुंचा हुआ देख सकने की थी । पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा के सूत्रधार एवं समर्थक थे, जिसमें राष्ट्रभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी ।

पूर्व विधायक अशोक साहू ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजनीति में कथनी और करनी में अन्तर न रखने वाले इस महापुरुष ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था बनाये रखी । हिन्दुत्ववादी चेतना को वे भारतीयता का प्राण समझते थे । राष्ट्रनिर्माण के कुशल शिल्पियों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय न केवल भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे, बल्कि उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी।

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