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जिला अस्पताल ने फर्जी बिल के आरोपी लेखापाल को नवाजा “सम्मान” जानिए कौन…

कवर्धा। भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लगाने सरकार किसी भी प्रकार का कानून बना ले, किंतु सरकारी तांत्रिक भ्रष्टाचार को अंजाम देने नित नए-नए रास्ते ढूंढ ही निकालते है। ऐसा ही एक ताज़ातरीन, अजीबोगरीब और हैरतअंगेज अविष्कार धर्मनगरी कबीरधाम के प्रख्यात और सदैव जनचर्चा में रहने वाले जिला अस्पताल कवर्धा में हुआ है। और इसके “मास्टर माइंड” हैं अस्पताल के लेखापाल दीपक ठाकुर। जिसे अस्पताल की तरफ से बकायदा सम्मान भी प्राप्त हो चुका है।

बता दें कि सरकारी पगार के अलावा, अवैध या कहे तो अतिरिक्त आय प्राप्त करने वाले इस अविष्कार में जीएसटी में रजिस्टर्ड फर्म का शासकीय लेन देन में दो तरह का बिल उपयोग करना होता है। एक जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर सहित फर्म का प्रिंटेड बिल जिसका भुगतान सीधे फर्म को करना होता है और दूसरा स्टीमेट प्रोफार्मा में जीएसटी रजिस्टर्ड फर्म का सील लगाकर भुगतान फर्म को नहीं करके डायरेक्ट लेखापाल दीपक ठाकुर को करना होता है।

बता दें जिला अस्पताल के मशहुर लेखापाल दीपक ठाकुर के विरुद्ध फर्जी बिलो से जीएसटी चोरी और फर्मो का भुगतान स्वयं प्राप्त करने की शिकायत वाणिज्य कर मंत्री टीएस सिंहदेव के समक्ष हुई थी, नतीजतन शिकायत पर राज्य कर आयुक्त ने कलेक्टर को जाँच के लिए पत्र दिनांक 12 जनवरी 2021 भेजा है। फलसफा अस्पताली जांच दल द्वारा अधीनस्थ कर्मी को पाक-साफ साबित कर शायद जांच दल ने खुद का भी बचाव कर लिया।

जिला अस्पताल द्वारा दीपक ठाकुर को उनके फर्जी बिल पर क्लीन चिट का मुहर लगने से भ्रष्टाचार का अब यह नया पैतरा कारगर जरूर साबित होगा। एक ही फर्म का दो भिन्न बिल और बिल का भुगतान फर्म की जगह सीधे लेखापाल को। जाहिर है अन्य सरकारी कार्यालयों में दीपक ठाकुर रचित “भ्रष्टाचार का नमूना ” लोकप्रिय होकर कार्यालयीन प्रक्रिया में अपना स्थान अवश्य हासिल करेगा। खैर विभाग ने तो दीपक ठाकुर के इस जबरदस्त अविष्कार के लिए क्लीनचिट देकर उत्साहवर्धन किया है। ऐसे निर्दोष लेखापाल को उनके चमत्कारी अविष्कार के लिए सार्वजनिक गरिमामयी समारोह में शाबासी मिलना अति उत्तम होगा ताकि अन्य विभागों के सरकारी मातहतों को भी इसका लाभ मिल सके।

सीएस ने क्या कहाँ-
“धमाकेदार शिकायत पर की गई कार्यवाही के सम्बंध में धमाका न्यूज़ को सिविल सर्जन डॉ एसके तिवारी ने बताया कि मामले का पूर्व में उच्च कार्यालय से जाँच करवाया गया है, दीपक ठाकुर को जाँच में क्लीनचिट दिया गया है। Paid by me को उन्होंने बंद भी कराया था, आगे कार्रवाही कलेक्टर पर टीका है।

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