रोका-छेका फेल:मवेशीराज से रोड पर बढ़़े हादसे, किसी ने गंवाई जान तो कोई अस्पताल में भर्ती

- पालिका को ढाई साल में भी गौठान के लिए नहीं मिली जमीन
- रहने की जगह की व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर आवारा घूम रहे मवेशी, पालिका उनकी धड़पकड़ पर नहीं दे रहा ध्यान
सरकार की योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी का मुख्य उद्देश्य जिला मुख्यालय में ढाई वर्ष के बाद भी साकार नहीं हो पाया है। जिला मुख्यालय में शहरी गौठान के लिए जमीन नहीं मिल पाने के कारण आज तक शहरी गौठान प्रारंभ नहीं हो सका है। किसानों की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए शासन प्रशासन के द्वारा कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। खरीफ फसल के दौरान प्रशासन द्वारा पंचायत की मदद से रोका-छेका कार्यक्रम का भी आयोजन होता है ताकि मवेशी किसानों के खेतों तक ना पहुंच पाए।
मवेशी पालकों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर पर सभा का आयोजन किया जा चुका है। गांव के साथ नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित मवेशियों को सड़क से हटा कर कांजी हाउस और गौठान में रखने की जिम्मेदारी नगरीय निकायों के कमिश्नर एवं सीएमओ दी गई है। साथ ही मवेशियों के सड़क पर पाएं जाने पर इन अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। लेकिन जिला मुख्यालय में शहरी गौठान के लिए दो वर्ष बाद भी भूमि आवंटित नहीं होने के कारण शहरी गौठान का निर्माण नहीं हो सका है। शहर में गौठान नहीं होने के कारण आवारा मवेशी सड़कों पर डेरा डालने के साथ ही किसानों के खेतों तक पहुंच जाते हैं। प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी नरवा, गरूवा,घुरूवा और बाड़ी योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के पालतू मवेशियों को व्यवस्थित करना था। लेकिन फिलहाल योजना अपने लक्ष्य से शहर में काफी दूर नजर आ रही है।
नगर पालिका क्षेत्र में निराश्रित मवेशियों को संरक्षित करने में प्रशासन अब तक पूरी तरह से विफल रहा है। शहर के मुख्य सड़कों में भागलपुर चौक, रणजीता स्टेडियम चौक, अंबेडकर चौक, महाराजा चौक के आसपास मवेशी सड़क पर ही डेरा जमाए रहते हैं। जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं कई बार सड़कों पर मवेशियों के बैठने कारण कई वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हुए हैं। ढाई साल में गौठान के लिए तय नहीं हो सकी जमीन – प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों के साथ नगरीय निकायों में भी शहरी गोठान के निर्माण का निर्णय लिया था। इसके तहत नगर पालिका जशपुर ने भी इसका प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन ढाई साल बीतने के बावजूद नगर सरकार शहरी गोठान के लिए जमीन तय नहीं कर पाई है। नपा को शहरी गोठान के लिए तीन एकड़ जमीन की आवश्यकता है। पूर्व में शहर के बाहर गिरांग मोड़ की खाली जमीन का चयन किया गया था।
जानिए… मवेशी कैसे बन रहे हादसे का कारण
मौत के करीब से लौटे
अगस्त में शहर में रहने वाले सरीन राज अपने किसी काम से डौड़का चौरा की ओर गए हुए थे। शाम को डौड़का चौरा से वापस आते समय केंद्रीय विद्यालय के मोड़ के पास सड़क में मृत अवस्था में पड़े हुए एक मवेशी से उनकी स्कूटी टकरा गई। जिसमें वे गंभीर रुप से घायल हो गए थे।
गंवानी पड़ी जान
अगस्त माह में ही रात को बाइक से अपने घर जा रहे प्रदीप नायडू जिला अस्पताल के पास एक मवेशी से जाकर टकरा गए थे। इस हादसे में उनके सर में गंभीर चोट आई थी। जिसे देखते हुए जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें उपचार के लिए रांची रेफर कर दिया था। जहां उनकी मौत हो गई।
बाइक मवेशी से टकराई तो हुए घायल
22 अगस्त को बालाछापर में रहने वाला एक युवक अपने किसी काम से जिला मुख्यालय आया था और काम कर वह रात 7 बजे अपने घर जा रहा था। उसी दौरान रायगढ़ रोउ पर बैठे हुए मवेशियों से उसकी बाइक टकरा गई। इस हादसे में बाइक चालक युवक गंभीर रुप से घायल हो गया और उसकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई।
शहरी गौठान के बनने से ये होंगे फायदें
शहर गौठान का निर्माण हो जाने से शहर में आवारा घूमते हुए मवेशियों को वहां रखने में मदद मिलेगी। वर्तमान में शहर में गौठान नहीं होने के कारण शहर में घूमने वाले मवेशियों को नगर पालिका के द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जाता है। यदि गौठान का निर्माण करा दिया जाए तो नगर पालिका के द्वारा ऐसे मवेशियों को गौठान में रख सकती है। इसके साथ ही शासन के द्वारा गौठानों में महिला स्वसहायता समूहों को स्वरोजगार से भी जोड़ा जा रहा है।शहर मे गौठान के बनने से शहर की महिला स्वसहायता समूह को इसका लाभ मिल सकेगा। जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी।
सड़क बैठे मवेशियों के कारण होती है दुर्घटना
इन दिनों शहर के सड़कों में मवेशी बैठे रहते हैं। सड़कों में मवेशियों के बैठे होने के कारण आए दिन राहगीर दुर्घटना का शिकार भी हो रहे हैं। मवेशियों के कारण हो रहे सड़क दुर्घटना को देखते हुए यातायात पुलिस के द्वारा बीच में सड़कों में बैठे मवेशियों में रेडियम लगाने का भी काम किया था। लेकिन उसके बाद भी इस समस्या से राहगीरों को राहत नहीं मिल पा रहा है।
शहरी गौठान के लिए लिख रहे पत्र
नगर पालिका के उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि जिला मुख्यालय में शहरी गौठान की आवश्यकता है। शहरी गौठान नहीं होने के कारण नगर पालिका आवारा घूम रहे मवेशियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। शहरी गौठान का निर्माण हो जाने से उस गौठान में आवारा घूमने वाले मवेशियों को रखा जा सकता है। श्री गुप्ता ने बताया कि शहरी गौठान के लिए कलेक्टर से मिलकर चर्चा करते हुए उन्हें इस संबंध में पत्र भी लिखकर मांग करेंगे।



