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जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी का 83वां प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया

कवर्धा |
पुरी पीठाधीश्वर, गोवर्धन मठ के अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज का 83वां प्राकट्य महोत्सव पूरे देशभर में ‘राष्ट्रोत्कर्ष दिवस’ के रूप में हर्षोल्लास एवं श्रद्धा भाव से मनाया गया।

कवर्धा में यह विशेष आयोजन बुढ़ा महादेव मंदिर परिसर स्थित संत निवास में आदित्यवाहिनी के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 6 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और श्रीराम नाम संकीर्तन से हुई, जिसके पश्चात हिंदू राष्ट्र विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बृजकिशोर पाण्डेय आचार्य एवं गोपी शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कवर्धा नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष पवन जायसवाल तथा गुप्ता समाज के अध्यक्ष कन्हैया गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

दिल्ली में हुआ भव्य मुख्य समारोह

83वें प्राकट्य महोत्सव का मुख्य आयोजन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अत्यंत भव्यता एवं गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इसमें कवर्धा से भी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ, जिसमें प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश नंदन श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष आशीष दुबे, एवं जिला सचिव बृज भूषण वर्मा सम्मिलित रहे।

इस अवसर पर देशभर से आए संत समाज, धर्माचार्य, एवं सनातन धर्म श्रद्धालुओं ने पूज्यपाद श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य जी का पादाभिवंदन करते हुए राष्ट्र उत्थान के लिए उनके विचारों का अनुसरण करने का संकल्प लिया।

केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति

दिल्ली के कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, एवं सांसद डॉ. संबित पात्रा समेत कई गणमान्य अतिथियों ने शंकराचार्य जी का अभिनंदन करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विचारों को भारत की दिशा देने वाला बताया। सभी ने गुरुदेव के श्रीचरणों में प्रणाम निवेदित किया और शुभाशीर्वाद प्राप्त किया।

डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण

कार्यक्रम के पूर्व शंकराचार्य जी की प्रेरणादायी जीवनी पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया, जिसका निर्माण अवधेश नंदन श्रीवास्तव द्वारा किया गया था। इस डॉक्यूमेंट्री को विद्वान वक्ताओं, संतजनों और श्रोताओं द्वारा अत्यंत सराहा गया।

इस अवसर पर देशभर में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजनों के माध्यम से पूज्य गुरुदेव के श्रीविचारों के प्रचार-प्रसार का कार्य हुआ।

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