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मानसून 2023: मॉनसून में जठराग्नि यानि डायजेस्टिव फायर धीमी गति से फैलती है, जिससे पाचन तंत्र से संबंधित प्रभाव और भी अधिक होते हैं। इस मौसम में होने वाले कणों और संरचनाओं के कारण बैक्टीरिया और वायरस अधिक पाए जाते हैं, जिससे पाचन तंत्र से संबंधित संक्रमण का खतरा अन्य मौसमों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में मॉनसून में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आयुर्वेद सिद्धांत है कि अच्छा स्वास्थ्य अच्छा पाचन तंत्र की डेन है। हमारा स्वास्थ्य इस पर प्रतिबंध लगाता है कि हमारे शरीर का भोजन कितना पचाता है। सभी का केंद्र हमारा पेट होता है, जो खाना हमारा शरीर पचा नहीं पाता, वह शरीर को फ़ायदेमंद भोजन की जगह नुकसान पहुँचाता है।
अन्य अंगों पर पाचन तंत्र का प्रभाव पड़ता है
पाचन तंत्र की क्रियाएं अन्य तंत्रों पर ही नहीं, बल्कि अन्य तंत्रों पर भी प्रभाव डालती हैं। समुद्र तट पर खुलासा में रहने वाले क्वार्टर का कंपोजिशन बदल दिया गया है। इससे हमारा पाचन तंत्र प्रभावित नहीं होता और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। जब हमारा पाचन तंत्र अच्छा होता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र भी बेहतर होता है, क्योंकि हमारी 70-80 प्रतिरक्षा तंत्र मात्रा में मौजूद होते हैं।
मानसून के लिए औषधि इंजेक्शन
एक आयुर्वेदिक आहार में कार्बोहाइड्रेट फल वॅस्ट्रेटरी, सूखे मेवे, साबुत अनाज, दालें और पदार्थ पदार्थ शामिल होना चाहिए। मॉनसून में शरीर में वसा बढ़ती है, इसलिए आहार, आहार, मिठास-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से, इन दिनों में प्रभाव खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद होता है।
इन बातों का विशेष ध्यान
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मॉनसून खाने में बैक्टीरिया और वायरस काफी संख्या में पढ़ते हैं, इसलिए खाना पकाना, खाना बनाना और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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घर के बने उद्यम, सुपाच्य और मितली भोजन का सेवन करें। बाहर का खाना उपयोगी नहीं है क्योंकि इससे पेट में संक्रमण हो सकता है।
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प्रतिदिन का साबुत रूप में साबूत, लेकिन ध्यान रखें वह त्रिमूर्ति होन।
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दाल और साबुत अनाज का भी सेवन करें। सफेद चीनी की जगह शुद्ध शहद और गुड़ का उपयोग करें।
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खाना न तो ज्यादा पका हुआ (ओवरकुक्ड) न कम पका हुआ (अंडर कुक्ड) होना चाहिए। इस सीज़न में बड़ा स्कोर और कम स्कोर वाला फल भी स्थिर नहीं है।
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हमेशा के लिए बनाया गया या फ़िल्टर किया गया पानी पीएं। खाना खाने से पहले अदरक के छोटे टुकड़ों के साथ सेंधा नमक का सेवन करें।
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इस सीज़न में हरे कीज़ से सीखें। साथ ही बासी भोजन स्थापित न करें।
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जब भी जरूरी हो अपने हाथों को साबुन से बदलें, आप अपने हाथों को आसानी से साफ करें। सूक्ष्मजीवों के कम संपर्क में आयेंगे।
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सड़क किनारे की रेहड़ियां और टॉयलेट स्टैंड से नहीं। मांस को अच्छी तरह पकाकर ही उसका सेवन करें।
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बारिश में पत्तेदार का सेवन न करें, क्योंकि एक तो रंगीन संक्रमण का खतरा होता है, दूसरा सैल्युलोज होता है, जिसे पचाने में परेशानी होती है।
मॉनसून के लिए पांच सुपर रेस्तरां
मॉनसून के मौसम में स्वास्थ्य विशेषज्ञ आहार में कुछ खाद्य पदार्थों की सलाह जरूर दें।
विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ: वर्षा के मौसम में अनार, मोसंबी, नीबू, जामिन आदि विटामिन-सी के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन-सी इम्युनिटी को बूस्ट करता है।
हल्दी: गोल्डन स्पाइनोज़ के नाम से मशहूर हल्दी मोनसून में कोई भी दवा कम नहीं है। इसका सेवन उतकों की सूजन और फंगस के संक्रमण से होता है।
अदरक और लहसुन: अदरक और लहसुन में विरोधी-असंतोष गुण होते हैं। अदरक पेट को आराम पहुंचाता है, क्योंकि यह पाचन में सहायता करता है। इस सीज़न में खाना खाने के बाद एक कप अदरक की चाय फ़ार्मुली अच्छी रहती है।
तरल पदार्थ प्रतिदिन : वर्षा में पानी की मात्रा कम होती है, लेकिन इस मौसम में भी 7-8 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। सुबह एक बल्ब गुनगुना पानी जरूर पीएं, इसमें एक छोटा सा मैग्नेटिक स्टॉक भी है। छाछ, सूप, नारियल पानी का सेवन भी करें।
मौसमी फल : फल विटामिन और विक्रय से भिन्न होते हैं। बहुमुखी फल खाना हमेशा के लिए स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
इन घरेलू उपायों से लेकर घरेलू राहत तक
बैल में फूड प्वाइज़निंग के काफी मामले सामने आ रहे हैं. फ़ायर प्वाइज़निंग को खाद्य जनित रोग भी कहा जाता है, क्योंकि ये हुए विषैले, साबुत या सादे भोजन को खाने से होता है। क्योंकि ये खाद्य पदार्थ, वायरस, दूसरे रोगाणु या विषैले आहार से प्रभावित होते हैं। यदि आवश्यक हो तो घरेलू उपायों से ठीक करने का प्रयास करें।
अदरक: खाद्य पदार्थ बनाने का कोई भी लक्षण दिखायी दे रहा हो, तो अदरक की चाय का सेवन शुरू कर दिया गया। यह आपके शरीर को खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को दूर करने में सहायता प्रदान करता है।
नीबू : नीबू में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी वायरल और एंटी विटामिन गुण होते हैं। नीबू में जो एसिड होता है. वह रिकॉर्ड को शूट करने में सहायता करता है, जो कि फूड प्वाइज़निंग का कारण बनता है। एक बड़ा नीबू के रस में एक चुटकी चीनी स्टैंसिल दिन में 2-3 बार पी लें। आप गुनगुने पानी में नीबू का रस स्टाम्प भी पी सकते हैं। इससे आपका पाचन तंत्र साफ हो जाएगा।
लहसुन: आपके एंटी वायरल, एंटी साइंटिस्ट और एंटी फंगल गुणों के कारण लहसुन फूड एफ वॉयजनिंग से शुरू होकर काफी मात्रा में है। यह डायरिया और पेट दर्द के रहस्य में भी आराम देता है। लहसुन की दो कलियों को पानी के साथ निगल लें।
जीरा: जीरा और पेट के भोजन की समस्या के कारण होने वाली परेशानी से आराम मिलता है। एक ओरियो जीरे को एक कप पानी में निवेश करें। यह अच्छा है इसमें एक धनिया पत्ती का रस और थोड़ा-सा नमक मिला हुआ है। इस दिन में दो बार कुछ दिन तक।
होमिय पैथिक में भी बेकरी से बचाव
बारिश के साथ कई रोग लेकर भी आते हैं। जहां कारखानों में नालियों का पानी के कारोबार पर एक नज़र आता है, वहीं अन्य उद्यमों में भी समुच्चय के भीतर तक पहुंच होती है। सोयायटी में रसायनिक पदार्थ के अलावा गोबर और पशुपालन के संपर्क में रहने से त्वचा संबंधी रोग भी हो जाते हैं।
इस सीज़न में छह प्रमुख किलेबंदी से बचाव की व्यवस्था आपको अवश्य करनी चाहिए। इनमें मलेरियल क्रिएटिन, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और खाज-खुजली जैसे चर्म रोग शामिल हैं। इसके अलावा कोल्ड कीडों के डंक भी कई लोगों को परेशान करते हैं। इन सभी इमारतों के मुख्य कारण बारिश से बने तालाब, तालाबों और पोखरों में जमा पानी में बाढ़ तेजी से बढ़ना है। बच्चों के लिए यह बारिश के मौसम का मजा देने के लिए आता है, साथ ही बच्चों की चेतावनी भी दी गई है।
सावधानी बरतना सबसे जरूरी है
घर के पास वर्षा का पानी जमा न होना। एक ही समय में एक ही समय में मच्छरदानी। मच्छर मारने वाली अगरबत्ती का व्यवहार घातक हो सकता है।
बाहर से घर आएँ तो सबसे पहले हाथ-पैर अच्छी तरह धो लें।
कपड़े को जिस पानी से बिटकॉइन, पहले थोड़ा सा विरोधी विचारधारा मिला लें।
बैल के मौसम में खुद को सबसे ज्यादा समय तक स्वाद नहीं मिलता। जहां तक हो सके, चिकने कपड़े बदल कर घुंघराले कपड़े, बच्चों को जूते में भीगने न दें।
कुछ उपयोगी होमियोपैथिक औषधियाँ
कुछ होम्योपैथिक दवाएं भी हैं, जो मौसम में आपको स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होती हैं, लेकिन यहां एक बात जोर से कही गई है कि अगर आपने आसपास के माहौल को साफ-सुथरा नहीं रखा है और बचाव के अन्य उपायों का ध्यान नहीं रखा है, तो ये दवा भी आपकी कोई सहायता नहीं कर सकती. अत: स्वयं स्वच्छ स्वच्छता, आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखना और आवश्यक बातों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। अगर आप कभी भी किसी रोग के जहर के बारे में जानते हैं, तो इन औषधियों का सेवन आप कर सकते हैं।
दल्कामारा, 30 : मौसम की यह पहली दवा है। इस औषधि का उपयोग पानी में बिग्ने के बाद सर्दी और खांसी हो जाने पर, जोड़ों के दर्द में और दमा, अतिसार, पेचिश, कमर में दर्द, पेड़ों के एक्जिमा, जुलपित्ती आर्च तथा मुंह से लार में कुछ दिनों तक प्रतिदिन तीन बार सेवन करना वरदान है.
यूपियोटोरियम परफोलिएटम, 30 : मलेरिया, इन्फ्लूएंजा, गंभीर ज्वर, शरीर में हड्डी टूटने का दर्द, सिर दर्द, कमर में ऐंठन और पित्त की उल्टी में दर्द। यदि इसी औषधि को 200 शक्ति (पोटेंसी) में लिया जाए, तो यह सूची ज्वर की औषधि का कार्य करती है।
मार्कसोल, 30 : अतिसार, अन्य दूध के दांत, काले, या पीले दांत, टॉन्सिल, मुंह से लार और पेट दर्द के बाद होने वाले दस्त में यह दवा बहुत है।
नेट्रम सल्फ्यूरिकम, 30 : गहरा पीला और कभी-कभी हरे रंग का दस्त, पेट में दर्द, अम्लपित्त के रोग, छाती में दर्द, पथरी बुखार और मलेरिया की बीमारी जैसे दिन में तीन बार इस दवा का व्यवहार करना होगा।
जेलसीमियम सेम्पर, 30 : हर प्रकार के ज्वर में तथा पत्थरों में होने वाले घातक ज्वर में भी प्रयोग करने योग्य एक रामवाण औषधि है। ज्वर होने के पहले ठंड लग रही है, फिर ज्वर बढ़ रहा है। भोजन आने पर ज्वार कम हो जाता है। इसके अलावा और भी दवाएँ हैं, रसटेक्स, आर्सेनिक एलबम, बेलाडोना, एकोनाइट, केम्फर आदि अनिद्रा लीज़ और चिकन एनेसी पर उपयोगी 30 शक्ति की दवा ली जा सकती है।
डॉक्टर गौरव जैन
सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनेशनल मेडिसीन, धर्मशिला नारायण हॉस्पिटल, दिल्ली
बातचीत एवं दस्तावेज़: शमीम खान
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