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डॉ केके पाण्डेय
सांस का फूलना यह बताता है कि शरीर को ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक से नहीं हो पा रही है और अंगूठा पर दबाव अनावश्यक है। कई बार जब दिल अपनी क्षमता से काम नहीं कर पाता तो शरीर के अंगों को पर्याप्त मात्रा में खून की सप्लाइ नहीं मिलती। इससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन कम मिलता है। इससे हम तेजी से और तेजी से सांस लेते हैं। इससे सांस फूलने लगती है। इसके अलावा ज्यादातर जीवाणु सीधे फेफड़ों से जुड़े होते हैं। ऐसे में अगर समय रहते सांस फूलने पर कंट्रोल नहीं किया गया तो परिणाम घातक तक हो सकते हैं। सांस फूलने को रोकने के दो ही उपाय हैं या तो शरीर की ऑक्सीजन की मांग को पूरा करने के लिए बाहर से अतिरिक्त ऑक्सीजन दिया जाए या फिर शरीर की ऑक्सीजन की आपूर्ति की मांग को कम किया जाए।
जलन की कमी भी कारण
सांस फूलने के दो मुख्य कारण- मोटापा व शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की कमी यानी एनिमिया की स्थिति। यदि ऑक्सीजन एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने वाले त्रुटियों की कमी है, तो ऑक्सीजन के सप्लाइ प्रमाण होंगे। ज्यादातर महिलाएं अपने देश में कुपोषण का शिकार हैं। काफी संख्या में महिलाएं बच्चेदानी की समस्या से परेशान रहती हैं। अपने देश में जरूरत से ज्यादा बच्चों के जन्म के बीच में फासला बहुत कम होना भी एनिमिया व सांस फूलने की शिकायत का एक बहुत बड़ा कारण है। सांस न फूले, इसके लिए भूख को खत्म करना भी जरूरी है।
मोटापा पर नियंत्रण रखना जरूरी
आज के समय में लोगों की तृप्ति और उसके साथ आराम से बढ़ोतरी हो रही है। नियमित प्रातः सुबह सैर करें व व्यायाम की कमी, शराब और चर्बी युक्त भोजन पदार्थों का भरपूर सेवन, ये दोनों ही चीजें शरीर की गड़बड़ी को गति से बढ़ा रही हैं। इस अतिरिक्त भार का मतलब शरीर में अतिरिक्त द्रव पदार्थ व पानी का लोड और हालांकि अतिरिक्त भार अगर दिल पर दें तो सांस फूलेगी ही। अक्सर आपने दृष्टिकोण से ग्रस्त लोगों को यह शिकायत करते सुना होगा कि जरा-सा छड़ी में सांस फूलती है। खराबे के अलावा दिल पर पानी का अतिरिक्त लोड का एक और कारण गुर्दे का रोग भी होता है। किडनी रोग से पीड़ित रोगी जब तेज या सीढ़ी से चलता है तो सांस फूलने लगता है।
कवक के विविध बड़े रोग
प्रभामंडल का संक्रमण : न्यूमोनिया व टीबी अपने देश में सांस फूलने का एक बहुत बड़ा कारण है। श्वास नली व उनकी फाइलों की दीवारों में सूजन भी एक कारण है, जिसे चिकित्सीय भाषा में एस्थमैटिक ब्रोंकाइटिस कहते हैं। कभी-कभी श्वास नली के अंदर किसी गिल्टी या छाती के स्थित ट्यूमर का दबाव भी सांस फूलने का कारण हो सकता है। अक्सर दुर्घटना में छाती की चोट का सही इलाज न होने पर, छाती के अंदर रक्त या मवाद जाम हो जाता है व झुंझलाहट पर दबाव बनाता है, जिससे बार-बार सांस फूलने के साथ-साथ खांसी की भी शिकायत रहती है।
स्कैलोडर्मा : यह बीमारी फैलाने वाला भी आहत करता है। इसकी सामान्य दीवारों में अस्वाभाविक परिवर्तन होते हैं, जिससे प्रभाव का वातावरण से आक्सीकरण की क्षमता गिर जाती है।
सांस फूलने की समस्या हो तो क्या करें
यह समस्या होने पर ऐसे अतिसंवेदनशील में, जहां आवश्यक जांच की सुविधा हो। जांच के बाद अगर लगे कि सांस फूलने का कारण फेफड़ा है, तो किसी छाती रोग विशेषज्ञ व थोरेसिक सर्जन दोनों से सलाह लें। अगर फेफड़ा हर समय होता है, तो सर्जरी में देरी व टाल-मटोली न करें, क्योंकि किसी दूसरे पक्ष के नॉर्मल चेहरे को भी चौपट कर देंगे। अगर सांस फूलना दिल की वजह से है, तो किसी हृदय विषेशज्ञ या कार्डियक सर्जन से परामर्श लें। गुर्दे विशेषज्ञ की राय भी लेनी चाहिए, अगर गुर्दे का रोल सांस फूलने में है।
इन जांचों से सही स्थिति का पता चलेगा
ऐसे तो अनगिनत अनगिनत हैं, पर कुछ अत्यंत आवश्यक दृश्य सांस फूलने के कारण समझने और उसके इलाज के लिए जरूरी हैं। छाती का एक्स-रे, छाती का एचआरसीटी, पीएफटी, दिल के लिए डीएसआईआई (डोब्यूटामीन स्ट्रेस ईको), रक्त की संभावना, जैसे- विटामिन डी की मात्रा व रक्त गैस विश्लेषण। कभी-कभी सीटी कोरेनेरी वैपमोनरी एंजियोग्राफी की भी आवश्यकता हो सकती है।
दिल के कौन-से रोग जिम्मेदार हैं
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अगर आपकी दिल की दीवार कमजोर है। यानी कभी हार्ट अटैक के दौरान दिल की दीवार का कोई एक हिस्सा बिल्कुल कमजोर हो जाता है, तो ऐसा कमजोर दिल, खून और पानी का सामान्य लोड भी नहीं उठाता है और सांस फूलने का कारण बन जाता है। ऊपर से अगर मोटापा भी है, तो स्थिति और भी कष्टदायक हो जाती है।
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विज्ञापनें तरफ का दिल का हिस्सा डी ऑक्सीजेनेटेड ब्लड का स्टोर हाउस है, जो गिरने के साथ शरीर के अंगों से आए हुए रक्त को शाहरुख की तरफ शुद्धिकरण के लिए नंबर देता है। फिर यह रक्त शुद्ध होने के बाद दिल के बायें हिस्से में जुड़ जाता है और शरीर के अंगों में फड़कने लगता है। यह क्रिया समान रहती है। अगर किसी कारण से वॉल्व का हर एक झटका के साथ न ठीक से पूरा बंद हो जाता है, न ही ठीक से खुलें तो दिल व चेहरा में संतुलन बिगड़ने के कारण अनावश्यक दबाव पड़ने लगता है। इससे भी सांस फूलने लगती हैं।
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अगर किसी को जन्म से दिल की बीमारी है व दिल में शुद्ध और डिजील रक्त का संदेश रहता है।
इन बातों का रखें खास ख्याल
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अगर आप 20 साल की उम्र से ही रोज 2 घंटे नियमित टहलते हैं और घंटे भर धूप का सेवन करते हैं और धूल-धक्कड़ से दूर रहते हैं, तो यकीन मानिए आप सांस फूलने की समस्या से काफी हद तक बच जाएंगे।
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मोटापा किसी भी हालत में न रायने दें। रोज 350 ग्राम सलाद व 350 ग्राम गांवों की परंपराएं।
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प्रोटीन प्रचुर मात्रा में लें। हरे पत्तेदार का नियमित सेवन करें।
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किसी भी तरह के धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से बचें। शराब की आदत न बनाएं।
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अगर ये सलाह मानेंगे, तो सांस फूलने की परेशानी को लेकर चक्कर नहीं आएंगे।
(वृष्ठ थोरेसिक एवं कार्डियोवैस्कुलर सर्जन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली)
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