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कॉक्लियर इम्प्लांट: सही जागरूकता और सरकारी व गैर-सरकारी योजनाओं की जानकारी हो तो बड़े से बड़े इलाज में बहुत कम खर्च या कभी-कभी बिल्कुल मुफ्त में हो सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ है बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड के श्याम प्रकाश (बदला हुआ नाम) के साथ। उनकी पुत्री मौलिक मौलिकबधिर थी। लेकिन वास्तविक की तंगी थी। लेकिन उनकी तीन साल की बेटी मुफ्त में ईएनटी सर्जन डॉ ने लाल से क्लिकर इम्प्लांट किया। अब उनकी बच्ची के बोलने पर रिएक्शन होता है। फिलवक्ता उसकी थेरेपी चल रही है ताकि सुने हुए शब्दों को समझ सके।
गरीब बाप को लगा था बहुत बड़ा झटका
दरअसल, श्याम प्रकाश को जब यह पता चला कि उनकी बेटी राधिका (बदला हुआ नाम) न सूर्य हो सकता है, न बोल तब राधिका लदान वर्ष की थी। राधिका को जिले के जिन-जिन डॉक्टरों के पास ले गए वहां उनके इलाज का खर्च छह से सात लाख रुपये बताया गया। एक गरीब बाप के लिए यह बहुत बड़ा झटका था।
बच्ची का इलाज शुरू विवरण
वो मुंबई में मजदूर काम करके अपना घर चलाते हैं। कोरोना काल की मार जितने के बाद घर खर्च करना पहले ही मुश्किल हो रहा था। अब बेटी के इलाज के लिए उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं थे। ऐसे समय में किसी ने उन्हें पुतेनाथ जाने की सलाह दी। उन्हें बताया गया कि सरकार और कुछ गैर सरकारी संस्थान ऐसे बच्चों का मुफ्त में इलाज करा रहे हैं। पुताने आने के बाद उन्होंने इसके बारे में और जानकारी जुटाई। जब उन्हें पूरा भरोसा हो जाता है कि उनकी बेटी का मुफ्त इलाज हो सकता है तब वे बच्ची का इलाज शुरू करेंगे।
इंप्लांट के बाद अब राधिका सुन रही है
नोएडा में विशेषज्ञ डॉ. अभिनीत लाल ने अपनी बेटी का इलाज किया। पहले करीब पांच महीने तक उसकी स्पीच थेरेपी चली। इसके बाद जनवरी में मध्य में उसका कॉक्लियर इम्प्लांट (जन्मजात मोनिकबधिर को सुनने में मदद करने वाला डिवाइस) बनाया गया। इंप्लांट के बाद अब राधिका सुन रही है। बोलने पर रिएक्शन होता है।
डॉ. अभिनय के अनुसार इस बच्ची के इलाज का खर्च एक गैर सरकारी संगठन ‘हंस फाउंडेशन’ ने उठाया। वैसे तो केंद्र सरकार भी ऐसे इलाज के लिए पूरा खर्च देती है। राधिका जब ठीक से सुनेंगे तो आगे चलकर बोलना भी शुरू कर देंगे।
श्याम प्रकाश के छोटे भाई और बच्ची के अंकल हरेराम (बदला हुआ नाम)कहते हैं कि उन लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि आज के समय में जब छोटा छोटा इलाज इतना महंगा हो गया है, वैसी स्थिति में इतना बड़ा इलाज बिल्कुल मुफ्त में हो सकता है। मेरी भतीजी का दूसरा जीवन मिला है। वह अब सामान्य जीवन जी सकता है। मेरा पूरा परिवार राहत महसूस कर रहा है। भैया अभी मुंबई में हैं.
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