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यूपी बजट सत्र 2023 | 34.09 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव जनविश्वास और सरकार की साख का प्रतीकः सीएम योगी

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सीएम योगी

लखनऊ: सरकार किस प्रकार की जानी चाहिए? परिस्थितियों से मुंह मोड़ने वाले या चुनौती के रूप में स्वीकार करने वाले और रिश्वत और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर काम करने वाले। नेता विरोधी दल जब बोल रहे थे तो ऊपर (यूपी) को पिछली सहमति पर अलग होने पर उन्हें क्षुद्रता हो रही थी। 2017 से पहले हंगामा क्यों हो रहा था पीछे। सभी जानते हैं। समस्या के दो समाधान होते हैं। भाग लो या फिर भाग लो…। या तो समस्या को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए उसका समाधान करो क्योंकि 6 साल में हमारी सरकार ने पूरे कार्यकाल के साथ काम किया है, या जैसे नेता प्रतिपक्ष की सीट खाली है ‘भाग लो’। बुधवार को विधानसभा में बजट (यूपी बजट सत्र 2023) पर चर्चा में भाग लेने वाले सीएम योगी कुछ इसी तरह के नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव (अखिलेश यादव) पर पंच करते नजर आए।

उन्होंने बजट पर चर्चा में हिस्सा लेने वाले सभी 134 सदस्यों का उत्साह व्यक्त किया तो अखिलेश यादव के सवालों और झूठ के साथ जवाब भी दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में जो 34.09 लाख करोड़ के प्रस्ताव आए वो जनविश्वास और सरकार की साख का प्रतीक हैं।

नेता विरोधी दल ने भी माना कि 34 लाख करोड़ से अधिक का प्रस्ताव आया

सीएम योगी ने सरकार के प्रावधानों के बारे में बात करते हुए कहा कि बहुत बड़े प्रदेश के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सब 25 करोड़ जनता के प्रतिनिधि के रूप में यहां बैठे हैं। नेता प्रतिपक्ष कह रहे थे कि आप दावोस गए हैं तो 50 लाख करोड़ का प्रस्ताव आता है। उन्हें विश्वास है कि प्रस्ताव आए हैं। ये जो 34.09 लाख करोड़ के प्रस्ताव आए। ये जनविश्वास और सरकार की साख का ही प्रतीक है। यह 2017 से पहले क्यों नहीं आया। प्रदेश की जनता और दुनिया 2013 के वाकये को नहीं भूलेगी, जब कुंभ पर प्रजात के लिए हावर्ड गए थे और चचाजान को तलाशी से अटक गए। प्रदेश को सोमवार को संदेश दिया। किसी एक क्षेत्र में ऊपर को आगे बढ़ाने का प्रयास होता है तो परिणाम अलग होते हैं।

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130 में 110 संकल्पों के लिए बजट की व्यवस्था

सीएम योगी ने 2022-23 के बजट की सराहना करते हुए कहा कि इस बजट में यदि आप देखें तो हम लोगों ने जनता से जो वायदे किए थे उन सभी की भविष्यवाणी इसमें समाहित है। 2022 के चुनावों में पार्टी ने लोक कल्याण संकल्प पत्र को जारी करते हुए 130 संकल्प का वादा किया था। 130 मे से 110 संकल्पों के लिए बजट की व्यवस्था की गई है। 64,700 करोड़ की राशि के लिए इसकी व्यवस्था की गई है। गरीब, किसान, नौजवान, महिलाओं के लिए इस लिस्ट की व्यवस्था की गई है।

आप घोषणा करते थे, हम संकल्प लेते हैं और उन्हें पूरा करते हैं

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इससे पहले आप घोषणापत्र जारी करते थे। घोषणाएं बड़ी-बड़ी होती थीं, होता कुछ नहीं था। 2016 में रियो दी जेनेरियो ओलम्पिक के खिलाड़ी, टूटे हुए पीवी सिंधुरा, कुश्ती में साक्षी मलिक और जिम्नास्टिक में दीपा कर्माकर को एक-एक करोड़ देने की घोषणा की थी। 6 महीने में कुछ नहीं किया, फिर जनता ने कुछ करने ही नहीं छोड़ा। जब हमें जानकारी मिली तब 26 जनवरी 2018 को प्रदेश सरकार की ओर से हमने राशि प्रदान की। आप घोषणा के अलावा और क्या करते हैं, हम लोग संकल्प करते हैं और उसी आधार पर कार्य करते हैं।

वित्तीय प्रबंधन ये है कि दोगुने से ज्यादा का ला रहे हैं रेवेन्यू

वित्तीय प्रबंधन को लेकर सीएम योगी ने कहा कि हमारे संकल्प पत्र को नेता विरोधी दल पढ़ रहे थे। वित्तीय प्रबंधन कैसे होना चाहिए। किस रूप में कर चोरी होती थी। कैसे प्रदेश के विकास का अनुमान लगाते थे। कैग की रिपोर्ट और अलग-अलग जाचों में रिपोर्ट मिलती है। याया एक्सप्रेस-वे विवरण (यीडा) 2016 तक 642 करोड़ का नुकसान हुआ और उसके रिकॉर्ड को लाभ हुआ। कहते हैं नोएडा जो होगा वो दुबारा नहीं आएगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि अब तो पक्का नहीं आएंगे, मैंने कहा था कि डंक की चोट पर आउंगा। सरकार कैसे काम कर रही है और आप कैसे कर रहे थे। सबसे पहले कमाई 86 हजार करोड़ की हुई थी। इस बार 31 मार्च तक कुल रेवेन्यू 2 लाख 30 हजार करोड़ रुपये आने वाले हैं। ये दोगुणे से ज्यादा है। 49-51 हजार करोड़ रुपये 2016 में आया था, अब 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये पार कर रहे हैं। एक्साइज में छद्म माफिया पर हावी हो गया था। स्टेट एक्साइज से प्रदेश को 12 हजार करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा पैसा मिला था, इस बार 45 हजार करोड़ रुपये आ रहे हैं। ये पैसा पास जा रहा था। ऐसे ही कोई इंग्लैंड में होटल और ऑस्ट्रेलिया में टापू न ली जा रही है।

6 साल में यूपी का बजट दोगुने से ज्यादा बढ़ा

बजट की सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पिछले 6 साल में यूपी के बजट का आकार दुगुने से अधिक बढ़ा है। 2016-17 में जो बजट 3.40 हजार करोड़ रुपए था वो इस बार दोगुने से अधिक यानी 6.90 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो रहा है। ये यूपी की उद्योग के विस्तार को प्रस्तुत करता है। यह समानता में विकास की प्रगति को, पर कैपिटा हाइलाइट्स में प्रमुखता को प्रस्तुत करता है। यूपी की ये यात्रा जनविश्वास पर आधारित है। यहां हर एक की पसंद है, कोई इससे भाग नहीं ले सकता। सरकार पूरी तरह से अंशों के साथ कार्य कर रही है।



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