नियमों को निरस्त कर लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि के बंद करना तानाशाहीपूर्ण व अलोकतांत्रिक : भाजपा

प्रदेश शासन ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन न कर नियमों को ही भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त कर असंवैधानिक कृत्य किया है
लोकतंत्र सेनानियों को दिया जा रहा सम्मान समाप्त करने का कोई अधिकार बाद में आने वाली सरकार को नहीं है : साय
रायपुर,1 अगस्त 2020 भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश शासन द्वारा आपातकाल के दौरान राजनीतिक व सामाजिक कारणों से नेता व डीआईआर में गिरफ्तार कर जेल में बंद किए गए लोकतंत्र सेनानियों को भाजपा शासन द्वारा वर्ष 2008 से प्रदान की जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि के नियमों को निरस्त कर सम्मान निधि बंद किया जाना पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण व अलोकतांत्रिक निर्णय करार दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि मौज़ूदा प्रदेश शासन ने स्वयं लोकतंत्र सेनानियों के सत्यापन के नाम पर सर्वप्रथम सम्मान निधि देना स्थगित करते हुए सत्यापन के बाद सम्मान निधि यथावत प्रदान करने का आदेश किया था परंतु एक वर्ष तक न तो शासन ने मीसा बंदियों का सत्यापन किया और न ही उन्हें सम्मान निधि प्रदान की। इसके बाद सेनानियों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्याय हेतु याचिकाएं प्रस्तुत कीं। उन याचिकाओं में उच्च न्यायालय ने शासन को आदेशित किया कि सेनानियों को बकाया सम्मान निधि का भुगतान किया जाए व सत्यापन की कार्यवाही की जाए। श्री साय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश शासन ने उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न कर आज दिनांक तक सेनानियों को आदेशित सम्मान निधि प्रदान करना छोड़, आपातकाल के समान ही न्यायालयीन आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेंककर अपनी हठधर्मिता से, जिन नियमों के आधार पर न्यायालयीन आदेश हुए, उन्हें ही भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त करने जैसा असंवैधानिक कृत्य किया है।



