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कैंसर समाचार: 2040 तक दुनिया भर में कैंसर परिवार में कैंसर की संख्या होगी 2.84 करोड़, भारत में मचेगी भारी तबाही

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कैंसर समाचार: अमेरिका के एक नामी कैंसर रोग विशेषज्ञ आशंकित हैं कि वैश्वीकरण, बढ़ती अर्थव्यवस्था, आवास और योजनाओं के निर्धारण के कारण भारत को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की ‘सुनामी’ का सामना करना पड़ेगा। इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उन्होंने तकनीक आधारित चिकित्सा तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है।

भारत के कैंसर विशेषज्ञ जैसी गंभीर बीमारियों की सुनमी का सामना करेगा :

अमेरिका के ओहियो में क्लीवलैंड क्लिनिक के हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ जेम अब्राहम ने कहा कि भारत की विशिष्ट सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि जब ये प्रौद्योगिकियां कैंसर की देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी तो इसे अपने लाखों लोगों के लिए कैसे मान्य और स्वीकार्य होगा बनाया गया। कैंसर विशेषज्ञों ने आश किया, वैश्वीकरण, बढ़ती अर्थव्यवस्था, आवंटन और जीवन शैली के कारण भारत कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की सुनमी का समाधान करेगा।

2040 में दुनिया भर में कैंसर की संख्या 2.84 करोड़ हो जाएगी

2040 में दुनिया भर में अटैचमेंट एक्सेस के कारण कैंसर आपकी संख्या 2.84 करोड़ होने की आशंका है, जो 2020 की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक होगी। यह संख्या वैश्वीकरण और बढ़ती उद्योग से जुड़े जोखिमों में वृद्धि से बढ़ सकती है। साल 2020 में दुनिया भर में सबसे ज्यादा कैंसर के 1.93 करोड़ नए मामले आए और करीब एक करोड़ लोगों को कैंसर हुआ।

डॉ जेम अब्राहम ने कैंसर से लड़ने के 6 उपाय बताएं

अमेरिका के ओहायो में क्लीवलैंड क्लिनिक के हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ जेम अब्राहम ने कहा है कि कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए टीके, कृत्रिम जीवाणु (वास्तविकता) और डेटा डिजिटल तकनीक का विस्तार और ‘तरल औषधि’ से उन छह का निदान आवेदन में शामिल हैं, जो इस सदी में कैंसर के उपचार को नया रूप देंगे। ‘मनोरमा ईयर बुक 2023’ के एक दस्तावेज़ में अब्राहम ने कहा है कि अन्य तीन बंजर ‘जीनोमिक प्रोफाइलिंग’, जीन एडिटिंग के विकास और अगली पीढ़ी के ‘इम्युनोथैरेपी’ और ‘सीरियो टी सेल थेरेपी’ का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है, डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी व टेलीहेल्थ से जुड़े लोग और पैरामीटर के बीच की बे कम होगी। यह ज़िज़ के रूप में हमारे देश के अनुपात के हिस्सों में डेटा की देखभाल की स्थिति में वृद्धि होगी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां हमारी अधिकांश आबादी रहती है।

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