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मकर संक्रांति पर क्यों बनते हैं तिल और तिलकुट, क्या हैं इसके फायदे?

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मकर संक्रांति 2023: मकर संक्रांति पर तिल और तिलकूट भोजन की परंपरा के पीछे ज्योतिषीय कारण माना जाता है। इसका संबंध शनि से है। साक्षी के अनुसार शनि महाराज ने तिल से ही मकर सूर्य देव की पूजा करके सुख समृद्धि प्राप्त की थी इसलिए मकर संक्रांति पर तिल से पूजा करें और तिल किसी भी रूप में खाने की परंपरा से चली आ रही है।

मकर संक्रांति एक हिंदू का प्रचलित त्योहार माना जाता है, जिसे पूरे भारत में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। भारतीय त्योहार में इस दिन विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं। जो भगवान को चढ़ाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड से बने लड्डू और चिक्की जैसी मिठाइयां बनाने की परंपरा है। आइए जानते हैं एक ही बार में तिल और गुड खाने के कई फायदे भी हैं। ऐसे में हम यहां आपको तिल और गुड के बने लड्डू के फायदे के बार में भी कवरेज देते हैं।

सर्दियों में तिल

मुख्य रूप से तिल सफेद और काले होते हैं। सफेद तिल का सेवन आमतौर पर एक ही बार में गुड के साथ लिया जाता है। यह कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। वहीं गुड के लड्डू खाने से तुरंत ही शरीर को गर्माहट मिल जाती है।

बालों और त्वचा के लिए भी हेल्दी

तिल और गुड़ के लड्डू का सेवन करने से बालों की गुणवत्ता का आकलन होता है और त्वचा को हेल्दी रखता है। तिल में मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम से सेहत के लिए बेहद खराब माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति पर तिल और गुड के लड्डू खाने का और दान करने का वोग है।

दिल के लिए अच्छा

तिल के बीज मैग्नीशियम में उच्च होते हैं जो लो ब्लड प्रेशर में काफी मदद करते हैं। इसके अलावा इनमें से एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य के लिए प्लाक बिल्डअप को रोकने में मदद करता है। इसलिए जल्दी ही तिल और गुड़ के लड्डू खाने चाहिए।

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