छत्तीसगढ़ विशेषजांजगीर-चाम्पा जिला

आंखों पर दुष्प्रभाव कम्प्यूटर, टीवी, मोबाइल से कम उम्र के 356 छात्रों की आंखें कमजोर

मोबाइल और टीवी की लत बच्चों की नजर पर भारी पड़ रही है। टीवी, कम्प्यूटर व मोबाइल का दिन में कई घंटों तक उपयोग करने से बच्चों की आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इस बार बाल नेत्र सुरक्षा अभियान में 320 स्कूलों तक पहुंचकर 20 हजार 564 स्कूली बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग कर समस्याओं के बारे में डाटा जुटाया है। इनमें 356 विद्यार्थियों की आंखें कमजोर मिली। इनमें 297 विद्यार्थियों को चश्मा भी लग गया है, वहीं बच्चों में विटामिन ए की भी कमी पाई गई।

स्वास्थ्य विभाग ने अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 15 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चों की आंखों की जांच, उनकी बीमारियों का इलाज करने के लिए स्कूलों में कैंप लगाया है। सात दिन तक चलाए गए नेत्र सुरक्षा सप्ताह में विद्यार्थियों की आंखें कमजोर मिली। आंखों के डॉक्टर्स के अनुसार बच्चों में आंखों से संबंधित समस्या होने की मुख्य दो वजहें हैं, इसमें कई बच्चों को अनुवांशिक रूप से आंख में परेशानी होती है, वहीं ज्यादातर बच्चे टीवी और मोबाइल पर लंबा वक्त बिताकर अपनी आंखों की रोशनी कमजोर करते हैं।{ हर 20 मिनट में 20 सेकेंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
{ एक मिनट में पांच से दस बार पलक झपकाएं।
{ मोबाइल में ब्लू लाइट फिल्टर लगाकर काम करें।
{ आंखों और स्क्रीन के बीच कम से कम एक फीट की दूरी जरूर रखें।
{ पर्याप्त रोशनी में ही डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करें।
{ सोने से एक घंटे पहले डिजिटल उपकरणों का प्रयोग न करें।
{ स्मार्ट फोन को भी बिस्तर से दूर रखें।
{ साल में एक बार आंखों की जांच कराएं, बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।

डॉक्टरों के अनुसार विटामिन-ए शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है। विटामिन ए की कमी से अंधापन, एनीमिया, इम्यूनिटी कमजोर होना सहित शरीर को कई तरह से प्रभावित होती है। विटामिन-ए को नवजात शिशुओं व बच्चों के लिए जरूरी माना जाता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य में भी सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। विटामिन-ए कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। गाजर, चुकंदर, टमाटर, ब्रोकली, मटर आदि इसके अच्छे स्रोत हैं।

बाल सुरक्षा सप्ताह के दौरान दोनों जिलों के 320 स्कूलों में कैंप लगाकर 20 हजार 564 विद्यार्थियों के आंखों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें 356 विद्यार्थियों को दृष्टिदोष पाया गया है, वहीं 54 ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्हें विटामिन ए की कमी पाई गई है, जो आगे चलकर आंखों को रोशनी को कमजोर कर देती।

कोरोना के बाद बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ी है। लगातार टीवी या मोबाइल देखने से आंखों पर जोर पड़ता है। लगातार उपयोग करते रहने पर आंखों के मसल्स कमजोर होकर सिकुड़ने लगते हैं। इससे आंखों की समस्या बढ़ जाती है। बच्चे को धुंधला दिखाई देना, दूर की चीज को देखने के लिए आंखों पर प्रेशर डालना, थकान महसूस होना, लगातार सिरदर्द की शिकायत पर आंखों की जांच करवाना चाहिए। ताकि सही समय पर बच्चों की सही स्थिति का पता चल सके। बच्चों को कम उम्र में टीवी, कंप्यूटर व मोबाइल से दूरी बनाना चाहिए।

 

Related Articles

Back to top button