निशुल्क प्रशिक्षण: छिन्द गांव के गोठान में गोमूत्र क्रय और उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया सिखाई

कलेक्टर डॉ. फरिहा आलम के निर्देश पर शनिवार को शासन की बहुआयामी गोधन न्याय योजना के तहत छिन्द ग्राम, सारंगढ़ के गोठान स्थल में कृषि विभाग द्वारा गोमूत्र क्रय व उत्पाद निर्माण, ब्रम्हास्त्र जीवामृत बनाने संबंधी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान कृषि विस्तार अधिकारी केपी पटेल ने ब्रम्हास्त्र, बीज जनित रोग और जीवामृत के संबंध में उपस्थित गोठान समिति व समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया।
इस दौरान ब्रम्हास्त्र की निर्माण विधि के बारे में बताया, जिसमें 10 लीटर गोमूत्र, बेलपत्ती, आख, धतूरा, नीम व सीताफल की पत्ती को एक-एक पाव की मात्रा में मिट्टी के बर्तन में डुबाकर रखना है। इसे डेढ़ से दो लीटर के हिसाब से प्रति एकड़ इसका छिड़काव किया जा सकता है। बीज जनित रोग- 5 लीटर गोमूत्र, 50 ग्राम चूना व 20 लीटर पानी, बरगद पेड़ के नीचे की मिट्टी इन सभी को मिश्रित कर 24 घंटे के लिए रखना है।
बीज बोने के एक दिन पहले छाया में रखना है। जीवामृत बनाने 200 लीटर पानी, 10 किलो ताजा गोबर, 2 किलो गुड़ या बेसन 1 किलो बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी में छायादार जगह में बनाना है। जूट के बोरे में ढंककर इसे घड़ी की दिशा में घुमाना है और 5 से 7 दिन रखना है। अब जीवामृत तैयार है। प्रशिक्षण में आए गोकुल साहू ने 5 लीटर गोमूत्र की खरीदी की। उक्त प्रशिक्षण के दौरान सारंगढ़ सीईओ अभिषेक बैनर्जी, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी जीपी गुप्ता, कृषि विभाग के अन्य अधिकारी, ग्राम पंचायत के सदस्य, गोठान समिति और स्व-सहायता समूह के सदस्य उपस्थित रहे।



