80 आदिवासी छात्रावास , करप्शन में डूबे

गरियाबंद। जिले में आए दिन करप्शन के पन्ने खुल रहे हैं. कभी पंचायत में घोटाला तो कभी शिक्षा विभाग में तो कभी अन्य विभागों में करप्शन की इबारत लिखी गई है, जो किसी से छुपा नहीं है. अब नया कारनामा शिक्षा विभाग का आया है, जहां बेखौफ गड़बड़ियां की गई हैं. निर्माण, खरीदी और मरम्मत के नाम पर सालाना 1 करोड़ खर्च के बावजूद 80 छात्रावास और आश्रम में भारी कमियों के बीच आदिवासी छात्र छात्राएं भविष्य गढ़ रहे हैं. बेटियों के शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ है, तो कहीं सोने के लिए पर्याप्त बिस्तर भी नहीं. जर्जर छत भी दुर्घटना को न्यौता दे रहा.
आदिवासी विकास विभाग किस तरह आदिवासियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है. उसके अधीन सन्चालित आदिवासी छात्रावास और आश्रम की दुर्दशा ये बताने के लिए काफी है. जिले भर में 80 आवासीय संस्थाएं इस विभाग के अधीन सन्चालित हैं. जहां आदिवासी और जनजाति समुदाय के 2 हजार 638 बालक और 1 हजार 726 बेटियां घर छोड़ कर पढाई कर रही हैं. संस्थाओं के हाल जानने कलेक्टर प्रभात मलिक ने जिले के शीर्ष 25 अफसरों को संस्थान के निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. महिला अफसर भी इसमे शामिल थीं.
अफसरों की रिपोर्ट में 95 फीसदी संस्थानों में कमियां और खामियां पाई गई हैं. फिंगेश्वर, पीपरछेड़ी समेत 4 से ज्यादा कन्या छात्रावास शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ है. नागिन बहरा के छात्रावास में सेफ्टिक टैंक की आवश्यकता है. आमामोरा छात्रावास में दरारें पड़ चुकी हैं. स्लैब को ईंटों का टेम्पररी दीवार का सहारा दिया गया है.
मैनपुर, दर्रीपारा, लिटीपारा, छुरा, पीपरछेड़ी जैसे 20 से ज्यादा छात्रावास में दीवार टूट कर गिरने की आशंका बनी हुई है. अफसरों ने यंहा तत्काल मरम्मत की आवश्यकता बताई है. मैनपुर में संचालित छात्रावासों में बिस्तर गद्दा कमी दर्शाया गया है. इसके अलावा बिजली, पानी और लाइट जैसी समस्याओं का भी नोडल अफसरों ने अपने रिपोर्ट में जिक्र किया है.
आदिवासी विकास विभाग में जनजाति व आदिवासियों के नाम पर बनी योजनाओ में बंदरबांट के पहले भी कई मामले उजागर हो चुके हैं. रिकॉर्ड के मुताबिक भारी भरकम बजट के बीच आदिवासी विकास विभाग को आश्रम छात्रावास के रखरखाव, मरम्मत और जरूरत की सामग्री खरीदी के लिए प्रत्येक वर्ष 1 करोड़ मिल रहा है. बावजूद संस्थानों की स्थिति सही नहीं है.
सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा मामले में बात करने विभाग के सहायक आयुक्त बद्रीनाथ सुखदेवे को कॉल और मेसेज किया गया, लेकिन उन्होंने बात नहीं की. मामले में कलेक्टर प्रभात मलिक ने कहा कि शासन के मंशा अनुरूप ही निरीक्षण करवा कर कमियों की जानकारी ली गई है. जरूरत के आधार पर स्टीमेट तैयार करवाया जा रहा है. मनरेगा और अन्य मदों से काम कराया जा रहा है. सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा. गड़बड़ियों पर भी जल्द जांच और कार्रवाई होगी



