छत्तीसगढ़ विशेष

रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नेता आचार्य धर्मेंद्र का निधन, जयपुर के SMS अस्पताल में ली अंतिम सांस

जयपुर| विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में शामिल रहे 80 वर्षीय आचार्य धर्मेन्द्र का देवलोकगमन हो गया। बीमारी के कारण वह लंबे समय से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती थे। जहां अस्पताल के मेडिकल आईसीयू में वह उपचाराधीन थे।

1966 के गोरक्षा आन्दोलन में,श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन में और कई जनजागरण यात्राओं में आचार्य का अहम योगदान रहा हैं। आचार्य धर्मेन्द्र ने जयपुर के तीर्थ विराट नगर के पार्श्व पवित्र वाणगंगा के तट पर मैड गांव में अपना जीवन व्यतीत किया। गृहस्थ होते हुए भी उन्हें साधू संतो के समान आदर और सम्मान प्राप्त था।

आचार्य धर्मेन्द्र विश्व हिन्दू परिषद

के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में शामिल रहे। आचार्य का पूरा जीवन हिंदी, हिंदुत्व औरहिन्दुस्थान के लिए समर्पित रहा। अपने पिता महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज के समान उन्होंने भी अपना सम्पूर्ण जीवन भारत की सेवा में, अनशनों, सत्याग्रहों, जेल यात्राओं, आंदोलनों एवं प्रवासों में रहकर समर्पित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूछा था स्वास्थ्य के बारे में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आचार्य धर्मेंद्र के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
आचार्य धर्मेन्द्र जयपुर के सवाई मान सिंह सरकारी अस्पताल में करीब एक माह से भर्ती थे। भाजपा के ओम माथुर ने उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेकर प्रधानमंत्री मोदी को स्वास्थ्य की जानकारी दी थी।

इसके अलावा लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला,राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया समेत कई नेताओं ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी।

गोरक्षा आंदोलन में रहा योगदान

1966 में देश के सभी गोभक्त समुदायों, साधु संतो और संस्थाओं ने मिलकर विराट सत्याग्रह आन्दोलन छेड़ा।

आचार्य के पिता महात्मा रामचन्द्र वीर ने लगातार अनशन करके स्वयं को नरकंकाल जैसा बनाकर अनशनों के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए।

जगद्गुरु शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ ने 72 दिन,संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी ने 65 दिन आचार्य धर्मेन्द्र ने 52 दिन और जैन मुनि सुशील कुमार ने 4 दिन अनशन किया। आन्दोलन में पहली महिला सत्याग्रह का नेतृत्व प्रतिभा धर्मेन्द्र ने किया और अपने तीन शिशुओ के साथ जेल गई।

पहली धर्म संसद अप्रैल 1984 में विश्व हिन्दू परिषद् की ओर से धर्म संसद में राम जन्मभूमि के द्वार से ताला खुलवाने के लिए जनजागरण यात्राएं करने का प्रस्ताव पारित करने और राम जानकी रथ यात्रा और विश्व हिन्दू परिषद की ओर से अक्तूबर 1984 में जनजागरण के लिए की गई सीतामढ़ी से दिल्ली तक राम जानकी रथ यात्रा में आचार्य धर्मेन्द्र का अहम योगदान रहा।

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