बकरियों ने खोला चरवाहे की हत्या का राज, जानिए क्या है मौत के पीछे वजह

ग्वालियर| जिले में बकरी चरवाहे की गई हत्या, पुलिस को बकरियों को बेचे जाने की खबर मिली थी, जिस पर पुलिस एक्टिव हुई और बकरियों से होते हुए दो संदेहयों को पुलिस ने उठाया, जिन्होंने हत्या कर बकरियों को लूटने की वारदात को कबूल किया। आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी पुलिस के हाथ लगा है।
चरवाहा आदिवासी था। वह घर से 25 बकरियां लेकर जंगल में चराने के लिए निकला था, इसके बाद वह वापस ही नहीं लौटा। रात तक युवक और बकरियों का कुछ पता नहीं चलने पर परिजनों को चिंता हुई। गांव वालों के साथ मिलकर परिजन ने उसे जंगल में तलाशा, लेकिन युवक नहीं मिला।
बाद में परिजन ने आरोन थाने पहुंचकर सूचना दी। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कर पड़ताल शुरू की। उसकी तलाश में सुबह गांव वालों के साथ फिर परिवार निकला था।8-10 किलोमीटर दूर घने जंगल में उसकी लाश मिली । वह जमीन पर औंधे मुंह मृत पड़ा हुआ था। उसके सिर के बाल और चेहरे से मांस गायब था। बाकी शरीर सही सलामत था।
परिजन ने पुलिस को मौके पर बुलाया। उसके साथ मिलकर जंगल को काफी अंदर तक और खंगाला, लेकिन बकरियां नहीं मिलीं थीं, जबकि गांव में उसकी किसी से दुश्मनी भी नहीं थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर घाटीगांव-आरोन थानों की एक ज्वाइंट टीम बनाई गई। टीम ने जांच शुरू की तो पता लगा कि जिस इलाके में हत्या की गई है, वहां हाल ही में दुर्गा बंजारा और राकेश बंजारा को देखा गया था।
दुर्गा बंजारा पूर्व में ग्वालियर-चंबल अंचल के जंगलों में खूंकार डकैत बदना बंजारा डकैत गिराेह का स्थायी सदस्य रह चुका है। बदना का अंत होने के बाद वह हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण के 20 से अधिक मामलों में आरोपी था। उसे 20 साल की सजा भी हो चुकी थी। यह नाम सामने आते ही पुलिस ने छानबीन शुरू की। इसी समय पता लगा कि डबरा में मवेशी काफी संख्या में बेचे गए हैं।
पुलिस डबरा पहुंची तो वहां से दुर्गा बंजारा का ही नाम मिला। इसके बाद घेराबंदी कर पुलिस ने दुर्गा बंजारा और राकेश को गिरफ्तार किया। जब पुलिस ने आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की तो उन्होंने बकरियां लूटने और विरोध करने पर चरवाहे की कुल्हाड़ी मारकर हत्या की बात कुबूल ली। पुलिस ने आरोपियों से वारदात में उपयोग की गई कुल्हाड़ी भी जब्त कर ली है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।



