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क्या मिलेगा “मीना खलको” को इंसाफ ? आरोपियों को कोर्ट ने बाइज्ज़त किया बरी, सामूहिक दुष्कर्म कर की गयी थी हत्या

रायपुर/अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ की आदिवासी मीना खलको का भी केस खत्म हो गया है। बलरामपुर जिले के छोटे से गांव करगा की 15 साल की मीना की हत्या के आरोपी दो पुलिसकर्मियों को कोर्ट ने इसी महीने बरी कर दिया। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में जांच को स्तरहीन बताया है। वहीं मीना के माता-पिता की लड़ाई भी खत्म हो गई। गरीबी के चलते अब वह हाईकोर्ट में अपील के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं।

रायपुर की ADJ कोर्ट ने 5 मई को फैसला दिया है। कोर्ट ने माना है कि विवेचना की कार्रवाई निम्न स्तर की थी। विवेचना के दौरान कथित अपराध से संबंधित तथ्यों को स्थापित करने में पूरी तरह असफल रहे। लापरवाही के कारण साक्ष्य का नहीं मिल सका। इससे आरोपी संदेह के घेरे में होने के बावजूद दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो, साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता है।अपनी झोपड़ी के बाहर बैठे मीना के माता-पिता। दोनों मजदूरी करते हैं।

अगले दिन पता चला, बेटी को पुलिस वालों ने मार दिया है
कोर्ट के फैसले के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने मीना के पिता बुधेश्वर खलखो से बात की। वह कहते हैं कि उनकी बेटी की हत्या ही नहीं की गई, बल्कि उससे सामूहिक दुष्कर्म भी हुआ। बुधेश्वर बताते हैं कि मीना 5 जुलाई 2011 को अपनी सहेली के घर जाने के लिए शाम को साइकिल पर निकली थी। इसके बाद नहीं लौटी। हमें लगा कि वहीं रुक गई होगी। अगले दिन सुबह खेत में हल चलाने गए तो पता चला कि बेटी को पुलिस वालों ने मार दिया है। तब भी लगा कि बेटी जिंदा होगी। गोली मारने वाली बात सोची ही नहीं। बताया गया कि मीना को चांदो के स्वास्थ्य केंद्र में ले गए हैं। इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ पैदल ही घर से निकल पड़े। इस दौरान नाले के पास पुलिस का एक जवान मिला। वर्दी में, बंदूक टांगे हुए। कहा कि आप लोग मीना के माता-पिता हो, गलती से उसे मार दिए हैं। यह सुनने के बाद हमारे पैर लड़खडाने लगे। किसी तरह अस्पताल पहुंचे तो वहां बेटी की लाश पड़ी थी।मीना के पिता बुधेश्वर खलखो ।

बुधेश्वर खलखो कहते हैं कि उनकी बेटी को मारने वाले कोर्ट से बरी हो गए हैं। इसका भी पता उन्हें मीडिया से लगा। तब से न्याय की उम्मीद टूट गई है। हमारे पास इतना पैसा नहीं कि अब कोर्ट कचहरी में जा सकें। मीना पढ़ने में बहुत तेज थी, लेकिन 5वीं से आगे नहीं पढ़ सकी। बोली थी कि मां-पिता कहां से पैसे लाएंगे। मां गोतियारी खलखो की भी आंखों में आंसू हैं। कहती हैं कि 11 साल पहले हम काम पर जाते थे तो वह खाना बनाती थी।

हत्यारों को बचाने थाना प्रभारी ने झूठे साक्ष्य गढ़े थे
बलरामपुर के लोंगरटोला में मीना खलखो की गोली लगने से मौत हुई थी। पुलिस ने दावा किया था कि झारखंड से आए नक्सलियों के साथ दो घंटे तक चली मुठभेड़ के दौरान मीना को गोली लगी थी। हंगामा हुआ तो जांच CID को सौंप दी गई। उन्होंने भी जांच में माना था कि मीना की हत्या कांस्टेबल धर्मदत्त धनिया और कांस्टेबल जीवनलाल रत्नाकर ने की थी। यह भी माना था कि हत्यारों को बचाने के लिए थाना प्रभारी ने झूठे साक्ष्य गढ़े थे।

फिलहाल कोर्ट के इस फैसले के बाद न्याय के लिए एक दशक से चल रही मीना के माता-पिता की लड़ाई खत्म हो गई है। खत्म इसलिए कि मीना के पिता बुधेश्वर खलखो कहते हैं कि गरीब को न्याय नहीं मिलता। उनके पास रुपए भी नहीं हैं, जो आगे की लड़ाई को जारी रख सकें। सरकार की ओर से उन्हें तब 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिली थी, लेकिन इस लंबी लड़ाई में खत्म हो चुकी है। वे कहते हैं कि अगर सरकार चाहे तो जांच कराकर न्याय दिलाए।

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