छत्तीसगढ़ विशेषजांजगीर-चाम्पा जिला

यहां रंग पंचमी पर निकलती है कलेश्वरनाथ की बारात

छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में रंग पंचमी के दिन बाबा कलेश्वरनाथ की बारात निकालने की परंपरा है। ये परंपरा कई साल पुरानी है। जिसका पालन आज भी होता है। इस बारात की खास बात ये है कि इसमें देशभर के नागा साधु शामिल होते हैं। ये यहां पर अलग-अलग तरीके के करतब दिखाते हैं। इसके अलावा शौर्य प्रदर्शन भी करते हैं। इस मेले में दूर-दूर से लोग शामिल होने आते हैं। इस दौरान लोग जमकर होली भी खेलते हैं।

जिले के पीथमपुर इलाके में ये परंपरा काफी पुरानी है। हालांकि ये कितनी पुरानी है। इसका जवाब अब तक किसी को नहीं मिला है। मगर यहां होने वाले मेले और बाबा कलेश्वरनाथ की बारात की चर्चा पूरे प्रदेश में होती है। बताया जाता है कि हर साल रंग पंचमी के दिन यहां बाबा की बारात निकलती है।

चांदी की पालकी में निकलते हैं बाबा

कलेश्वर नाथ मंदिर से बाबा की बारात को चांदी की पालकी में निकाला जाता है। इसके बाद गांव के ही हसदेव नदी में बाबा को साधु स्नान कराते हैं। यहां महा आरती के बाद में बारात को वापस मंदिर तक ही लाया जाता है। इस बारात में शामिल होने देशभर के अलग-अलग अखाड़ों के नागा साधु शामिल होते हैं। जो तलवारबाजी, लठबाजी और तमाम तरीके के करतब दिखाते हैं। यहीं यहां पर आकर्षण का केंद्र होता है।

दूसरे प्रदेश से भी आते हैं लोग, 3 बजे के बाद निकलेगी पालकी

साधुओं के अलावा यहां पर प्रदेश भर के लोग के साथ ही दूसरे प्रदेशों के लोग भी शामिल होने पहुंचते हैं। इसके बाद दिनभर यहां होली खेली जाती है। इस बार यह बारात दोपहर 3 बजे के बाद निकलेगी। जो शाम तक चलते रहेगी। इसके लिए पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। लोग भी पहुंच गए हैं।पिछले साल इस तरह से पूजा की गई थी।

ये है मान्यता

लोगों का मानना है कि रंग पंचमी के दिन बाबा के दर्शन करने से कई लाभ होते हैं। इसमें सबसे बड़ा लाभ निसंतान महिलाओं को होता है। इसके अलावा यदि किसी को पेट की पुरानी समस्या है वह भी दूर हो जाती है। यह वजह है कि लोग यहां बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। बारात निकालने के साथ ही मंगलवार से यहां से 15 दिन के मेले की शुरुआत भी हो जाएगी।

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