यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के इलाज के लिए मिला नॉन एंटीबायोटिक तरीका, पढ़े ये खबर

लंबे वक्त तक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करने से इसके खिलाफ प्रतिरोधकता पैदा होने का खतरा बना रहता है. ऐसे में बहुत जरूरी है कि कोई गैर एंटीबायोटिक विकल्प ढूंढा जाए. इसी खोज में शोधार्थियों को कुछ सफलता हासिल हुई है. शोध से पता चला है कि मीथेनामाइन हाइप्युरेट एक ऐसी दवा है जो मूत्र को कीटाणुरहित बनाती है, इस तरह से कुछ निश्चित बैक्टीरिया की वृद्धि रुक जाती है. शोध के नतीजे बताते हैं कि यह यूटीआई यानी मूत्र मार्ग में होने वाले संक्रमण को रोकने में असरदार होती है. लेकिन अभी इसे लेकर और अध्ययन होना बाकी है.
दरअसल, यूटीआई ऐसी बीमारी है, अगर यह बार-बार होती है तो इसके इलाज के लिए कम मात्रा में लंबे वक्त तक एंटीबायोटिक लेना होता है. जिससे जहां एक तरफ किडनी को नुकसान पहुंचता है वहीं इससे दवा के प्रति-प्रतिरोधकता भी पैदा हो जाती है. यूके के शोधार्थियों ने 240 ऐसी महिलाओं पर रिसर्च किया , जिन्हें साल में करीब 6 बार यूटीआई की शिकायत होती थी. शोधार्थियों ने जून 2016 से जून 2018 तक दो साल के लिए 102 महिलाओं को एंटीबायोटिक और 103 महिलाओं को मीथेनामाइन हिप्प्यूरेट (एंटीसेप्टिक) दिया. 18 महीने तक हर तीन महीने में असर की जांच की गई.
जांच में सामने आया कि मीथेनमाइन देने से साल में औसतन एक बार यूटीआई होना कम हुआ था. इससे छोटे-से अंतर से यह कहा जा सकता है कि मीथेनामाइन एंटीबायोटिक से कम नुकसान करेगी और यूटीआई को रोकने में कारगर भी साबित हो सकती है. इस तरह से मीथेनामाइन के इस्तेमाल से एंटीबायोटिक की खपत को कम किया जा सकता है. शोधार्थियों का मानना है कि यह परिणाम बा- बार होने वाली यूटीआई के लिए चले आ रहे उपचार के तरीके में बदलाव लाने में मददगार साबित होंगे.



