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कहीं स्कूल नहीं खुले, कहीं शिक्षक गायब, खाना खाकर लौट रहे बच्चे

कांकेर|कोरोना के चलते लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई होेने के बाद स्कूल खोलने के आदेश दे दिए गए हैं । लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है। खासतौर पर अंदरूनी इलाकों में कहीं स्कूलों में ताले लगे हैं तो कहीं पूरे स्कूल का जिम्मा चपरासी के हवाले है। बहुत से स्कूल खुले तो हैं पर शिक्षक न होने से बच्चे स्कूल आकर खेल रहे हैं फिर मध्यान्ह भोजन करके घर चले जा रहे हैं। शिक्षकों की कमी भी पढ़ाई प्रभावित होने की एक वजह है। कुछ शिक्षक अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर पसंद के स्कूलों में पदस्थ हैं। कुछ दूसरे सरकारी दफ्तरों में अटैच हैं।

इस कारण बहुत से स्कूल एक शिक्षक वाले हो गए हैं। कारण कई हैं लेकिन नतीजा एक ही है कि परीक्षाएं सर पर है और बच्चों की पढ़ाई बरबाद हो रही है। कांकेर में सबसे ज्यादा अंतागढ़ व कोयलीबेड़ा विकासखंड के अंदरुनी इलाकों में एेसे नजारे दिखते हैं। बांदे इलाके के ग्राम पंचायत तिरलगढ़ प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल में ऐसे ही नजारे दिखे। यहां चार शिक्षक पदस्थ हैं। पिछले दो दिन से चारों में से एक भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चे सुबह से स्कूल पहुंच खेलकूद कर वापस घर लौट जाते हैं। चपरासी स्कूल का दरवाजा खोलता है और बच्चों के जाने के बाद बंद कर देता है।

शिक्षकों की मनमानी से छात्र भी चिंतित
कोयलीबेड़ा इलाके में शिक्षकों की मनमानी से छात्र काफी चिंतित हैं। छात्राें ने बताया कि उन्हें स्कूल खुलने की जानकारी मिली थी। वे काफी खुश थे। इतने दिनों से स्कूल बंद होने से उनकी पढ़ाई ठप हो गई थी। इलाके में नेटवर्क नहीं होने के कारण ऑनलाइन क्लास लगाना संभव नहीं था। बच्चे पढ़ाई करने के बजाय खेत में काम करने जाते थे। छात्रों ने कहा जब तक शिक्षक स्कूल नहीं आएंगे तब तक उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है। यदि वे नहीं आएंगे तो उनकी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी।

अकलतरा
​​​​​​​स्कूल में नहीं पहुंचे शिक्षक बीईओ से की गई शिकायत
शासकीय प्राथमिक स्कूल झलमला में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी चंदसेन बरेठ, हेमंत कुमार चंदनकर, राजेश कुमार कैवर्त्य, नवीन सिंह एवं समिधा सिंह सहित पांचों शिक्षक गुरुवार को अनुपस्थित थे। कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्र-छात्राएं दोपहर 2 बजे तक शिक्षकों के इंतजार करने के बाद मध्याह्न भोजन खाकर अपने घर वापस लौट गए। मामले की सूचना गांव के उपसरपंच राजाराम एवं अभिभावकों को मिलने पर वे स्कूल पहुंचे। तब तक कोई शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने बीईओ, संकुल प्रभारी एवं शैक्षिक समन्वयक को सूचना दी।

जशपुरनगर
अफसर-जनप्रतिनिधियों के पीए बन बैठे शिक्षक​​​​​​​
जुगाड़ बनाकर अपनी पसंद के स्कूलों में अटैच शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने की कार्रवाई शुरू हो गई है। स्कूलों में अटैच शिक्षकों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द अपनी मूल पदस्थापना में जाने को कह दिया है। कई शिक्षक ना सिर्फ विभिन्न विकासखंडों के बीईओ, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, डीईओ कार्यालय में अटैच हैं बल्कि सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष जैसे जनप्रतिनिधियों के पीए तक बने हुए हैं। कई शिक्षक को अटैच हुए इतना लंबा वक्त गुजर चुका है कि वे खुद को कार्यालय का ही स्टाफ समझने लगे हैं। ​​​​​​​

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