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आहार और पोषण युक्तियाँ: पेट में गैस बनना बहुत आम बात है और हर व्यक्ति का डकार या हवा निकलना के माध्यम से गैस को बाहर निकालना होता है। हालाँकि, कई लोग गैस लेकर शर्मिंदगी भी महसूस करते हैं। पेट में लहसुन उगाने के कई गुण हो सकते हैं। उनमें से एक यह है कि हम अपने आहार में इतनी गड़बड़ी करते हैं कि सूजन और गैस की समस्या हो जाती है। ऐसे कई खाद्य पदार्थों के सेवन से एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ सकती है। कुछ साबुत दाल और उन खाद्य पदार्थों में से जो पेट में गैस का कारण बनते हैं। इस लेख के माध्यम से आज हम दालों के स्वाद के बारे में बात करेंगे कि किन दालों को खाने से पेट में गैस बनती है, तो आइए जानते हैं-
फिक्शनल डिजिटल हेल्थकेयर वैज्ञानिक शिखा गुप्ता अपने सोशल मीडिया पर अंतर्ग्रहण और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करती हैं। अपने एक पोस्ट में उन्होंने डालों से होने वाली ब्लोटिंग के बारे में भी बात की थी. उनका कहना है, “दाल और फलियां कई पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन उनमें पाचन संबंधी विकार पैदा हो सकते हैं।” शिखा ने इसके पीछे का कारण और दाल खाने के बाद पेट फूलने की समस्या से बचने के उपाय भी बताए हैं, आइए इस लेख में उनके बारे में जानें।
दाल खाने से गैस क्यों बनती है?
फलों में एक विशेष प्रकार की ग्लूकोज होती है जिसे मनुष्य पूरी तरह से पचा नहीं पाता है। शीशी के टुकड़ों को टुकड़ों में बाँट कर बनाया जा सकता है, लेकिन मानव शरीर में एंजाइमों का उत्पादन नहीं होता है, जो फलों में मौजूद अवशेषों को ठीक से तोड़ा जा सकता है। पेट के हिसाब से ये चीनी को बर्बाद कर देते हैं और हमारे बाद में चलने वाली किन्वन प्रक्रिया से गैस पैदा होती है। जो हमारे शरीर से बेकार है
गैस का कारण
अब ये जरूरी है कि आपके पेट में गैस नहीं बनेगी. यह किसी भी कारण से उत्पन्न हो सकता है. इज़ाफ़ा की गैस, स्पेशियलिटी और कार्बन डाइऑक्साइड से बनी होती है और गंधहीन होती है। भोजन में मौजूद चीनी और उच्च भोजन वाले खाद्य पदार्थों से गैस की गंध आती है। यह एक आम समस्या है.
ऐसे ही दाल; गैस और सूजन नहीं होगी
वयोवृद्ध शिखा गुप्ता के पास भी हैं ऐसे टिप्स, जिनके बाद आपको कभी गैस और ब्लोटिंग की समस्या नहीं होगी। आप भी अपना नामांकन जरूर करवाएं ये 3 टिप्स-
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सूजन और गैस से बचने के लिए सबसे पहले दाल को कम से कम 8-10 घंटे तक के लिए। दाल और फलियों को केवल पोषक तत्वों से भरपूर आहार के रूप में लेना बेहतर है, बल्कि यह एमाइलेज को उबालने में भी मदद करता है। एमाइलेज एक ऐसी चीज है जो दाल और फलों में कॉम्प्लेक्शन के टुकड़ों को तोड़ने में मदद करती है, जिससे उन्हें पचाना आसान हो जाता है।
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दाल मिलाते समय 1 आटा साइडर सिरका मिलाने से भी गैस नहीं लगेगी। रेस्तरां पानी की तुलना में एप्लाइड साइडर सिरका को नरभक्षी बनाने और एंटी-पोषक तत्वों को कम करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि दाल को कम से कम 6-10 घंटे तक का समय दिया जाए। दाल को रात भरना सबसे अच्छा है।
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इसके अलावा दाल पकाते समय ऊपर जो सफेद झाग बनता है उसे भी हटा दिया जाता है। इस व्हाइट मेल को सैपोनिन के नाम से जाना जाता है और यह दाल पकाते समय ऊपर जमा हो जाती है। यह भी आपके पेट फूलने की समस्या का एक बड़ा कारण बनता है।
प्रो टिप
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ऐसे तत्व हैं जो आपके पाचन शक्ति को बढ़ावा देने का काम करते हैं। आपने देखा कि अरहर की दाल बनाने से पहले इसमें एक पिंचल हींग दाल दी जाती है। इसका निर्माण शुरू हो गया है। अगर आपने भविष्य में दाल तय की है तो इसमें अदरक और एक चुटकी हींग दाल शामिल है।
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अब आपने भी वास्तुशास्त्री द्वारा बताए गए इन आसान और जरूरी सुझावों और दालों से होने वाली गैस की समस्या को बताया है। 1 बड़े पैमाने पर कारीगरी अपनी दाल को स्वादिष्ट व्यंजन और लजीज भोजन का आनंद लें।
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