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विकास और सुशासन के 15 वर्ष, जिसने बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रमन सिंह का जीवनीय – डॉ.रमन सिंह, छत्तीसगढ़ का हर व्यक्ति “चाऊंर वाले बाबा” के नाम से जानता है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, व्यक्तित्व और स्वभाव से पूरे देश में एक अलग पहचान स्थापित की। बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में जो विकास की गंगा बहाई उससे हर कोई भलीभांति परिचित है।

डॉ. रमन सिंह का जन्म 15 अक्टूबर, 1952 को कवर्धा, छत्तीसगढ़ में हुआ था। डॉ. रमन सिंह को आयुर्वेदिक चिकित्सा में डिग्री प्राप्त है। वे बचपन से ही राजनीति में रुचि रखते थे। वह एक परिपक्व और सर्व आयामी विकास को महत्व देने वाले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपनी कुशल नीति और नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को पिछड़ा राज्य के गर्त से निकालकर विकास के पथ पर अग्रसर किया और यही नहीं छत्तीसगढ़ को एक मॉडल के रूप में पूरे विश्व के समक्ष रखा। उन्होंने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया कि यदि आपके अंदर सेवा का भाव हो तो बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने से आपको कोई नहीं रोक सकता।

डॉ. रमन सिंह ने अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत भारतीय जनसंघ के युवा सदस्य के तौर पर की। वर्ष 1990-1993 तक वह मध्य-प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। वर्ष 1999 में हुए राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ से लोकसभा चुनावों में जीत मिलने के बाद उनके राजनैतिक सफ़र को एक नया आयाम मिला। इस दौरान वाजपेयी सरकार के अंतर्गत रमन सिंह को केन्द्रीय राज्य मंत्री का पद देकर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का भार प्रदान किया गया। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ में बीजेपी का प्रदेश स्तरीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। रमन सिंह की कुशल अध्यक्षता के कारण वर्ष 2003 में उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।

उसके बाद रमन सिंह अपनी छवि और जनता के प्रति समर्पण भावना ने उन्हें प्रदेशवासियों का सबसे लोकप्रिय जन नेता के रूप में बनकर छत्तीसगढ़ में विकास की जो गंगा बहाई उससे पूरा प्रदेश और देश परिचित है। उनके द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं ने भाजपा के अन्त्योदय के लक्ष्य को परिलक्षित किया और प्रदेश के कोने-कोने में सड़क, बिजली, पानी जैसी भौतिक और मुलभुत सुविधाओं का निरंतर विस्तार हुआ। 1 रुपये किलो में चांवल देने की पीडीएस स्कीम की शुरुआत कर उन्होंने पूरे देश को चौंकाने के साथ ही एक रोल मॉडल भी स्थापित किया। उनकी इसी योजना के कारण उन्हें “चाऊंर वाले बाबा” की ख्याति मिली।

डॉ.रमन सिंह ने मुख्यमंत्री रहते अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में अनवरत कार्य किये। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, बुजुर्गों को संबल प्रदान करने जैसे कई योजनाओं का सञ्चालन किया। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकलन के अनुसार वर्ष 2006-2007 के दौरान छत्तीसगढ़ अनुसूचित जातियों और जनजातियों के उत्थान के लिए बनाए गए 20 सूत्रीय कार्यक्रमों को संचालित करने वाला पहला राज्य बना. इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह ही थे। छतीसगढ़ द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट मानव मॉडल को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया। वर्ष 2005 में नक्सलवादी आंदोलनों के खिलाफ चलाए गए एक शांति मार्च सलवा जुडुम की अध्यक्षता रमन सिंह ने ही थी. उनके इस कदम को विपक्षियों ने भी सराहा।

ऐसे कई योजनाएं, परियोजनाएं और विकास के कार्य डॉ. रमन सिंह द्वारा अपने कार्यकाल में किये गए जो आज भी छत्तीसगढ़ को विश्व मानचित्र में एक विकसित राज्य के रूप में अंकित किये हुए है। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये। नया रायपुर बनाने की उनकी योजना को विश्व ने सराहा। डॉ.रमन सिंह की सबसे बड़ी पहचान उनका व्यक्तित्व है। वे अत्यंत ही शांत, सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व रखते हैं अपनी इसी छवि से उन्होंने करोड़ों छत्तीसगढ़वासियों के दिलों में अपनी एक विशेष पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली अत्यंत ही संगठित थी। अपने व्यव्हार कुशल और जनता की सेवा के संकल्प के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ को जो विकास की गति दी, विश्व में जो पहचान दी, जनता को जो सम्मान दिया, हर व्यक्ति को उसका अधिकार दिया वह आज भी जिवंत है। छत्तीसगढ़ में विकास की धरा प्रवाहित करने वाले, विकास पुरुष और हमारे प्रेरणा स्त्रोत डॉ. रमन सिंह जी को उनके जन्मदिन के अवसर पर कोटि-कोटि बधाई एवं शुभकामनाएं।

भावना बोहरा समाज सेवी

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