हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला को अनुकंपा नियुक्ति देने का दिया आदेश पति की मौत के बाद सास को परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता

23 सितंबर 2021.बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अगर किसी परिवार में बेटे की मौत हो जाती है और उसकी मां शासकीय सेवा में है तो पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। क्योंकि, बेटे की मौत के बाद उनकी मां को परिवार के सदस्य के रूप में नहीं माना जा सकता। लिहाजा, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।
मामला बस्तर जिले का है। याचिकाकर्ता मुनिया मुखर्जी के पति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे। विभाग में सेवा देते हुए 30 अगस्त 2020 को उनकी मौत हो गई। इस पर पति की मौत के बाद उन्होंने अनुंकपा नियुक्ति के लिए विभागीय अधिकारियों के समक्ष आवेदनपत्र प्रस्तुत किया। लेकिन, विभाग ने उनके आवेदन पत्र को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राज्य शासन ने वर्ष 2013 में अनुकंपा नियुक्ति नियम में संशोधन किया है। इसके मुताबिक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित परिवार के सदस्य शासकीय सेवा में है तो उन्हें अनुकंपा नियुक्ति का पात्र नहीं माना जा सकता।
इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की सास मीना मुखर्जी शासकीय शिक्षक हैं। इसलिए बहू को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रविधान नहीं है। विभाग के इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि पति-पत्नी व बच्चे परिवार के सदस्य में शामिल होते हैं। पति की मौत के बाद सास को उनके परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों पर सहमति जताते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। साथ ही याचिकाकर्ता महिला के पति की मौत के बाद उनके आश्रित सदस्य मानकर अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है



