छत्तीसगढ़ विशेषदुर्ग जिलारायपुर जिला

इस जगह पर होती है 180 एकड़ में केवल सीताफल की खेती होती है.

रायपुर. आज अंतरराष्ट्रीय बाजार भी छत्तीसगढ़ में कृषि की ओर आकर्षित हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विकेता सम्मेलन में आने वाले विदेशी उद्यमी दुर्ग आकर हमारे सीताफल को हाथोहाथ लेते हैं. हमारे धमधा ब्लॉक का जैविक तरीके से तैयार फार्म हाउस एशिया का सबसे बड़ा सीताफल उत्पादक फार्म हाउस का तमका लिए हुए है. जिसमे 180 एकड़ में केवल सीताफल की खेती होती है.

मध्य भारत में सीताफल की सबसे ज्यादा खेती कांकेर जिले में होती है. इसके बाद दुर्ग जिले का नंबर आता है, लेकिन वैरायटी की बात करें तो सबसे ज्यादा 18 वैरायटी हमारे पास है. यहां 180 एकड़ क्षेत्रफल में खेती की जा रही है. इसमें सबसे ज्यादा बाला नगर प्रजाति का सीताफल पैदा किया जा है.

सीताफल के पेड़ की आयु 90 साल होती है. इस प्रकार यह 3 पीढ़ियों के लिए निवेश की तरह है. यहां फार्म से हर दिन 10 टन सीताफल निकलता है. सीताफल पकने पर इसका पल्प निकाल लेते हैं, जो आइसक्रीम आदि बनाने में काम आता है. छत्तीसगढ़ के कस्टेड एप्पल पल्प की भारी डिमांड होती है

सीताफल की कई तरह की किस्में यहां के खेतों में रोपी गई है. सबसे बड़े आकार के सीताफल महाराष्ट्र के सोलापुर, मराठवाड़ा में ही पाए जाते हैं. अब एक सीताफल एक किलो और मिठास के मामलों में हम भी बेहतर हो गए है. इनकी खासियत यह है कि ये सामान्य सीताफल से ज्यादा दिन तक पकने के बाद सड़ते नहीं है.

देश में सबसे अधिक क्षेत्र में सीताफल की खेती होती है और उत्पादन भी सबसे अधिक यहीं पर होता है. महाराष्ट्र के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आते हैं. इनके साथ ही असम, बिहार, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलांगाना और तमिलनाडू में भी सीताफल की खेती होती है

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