कांकेर जिला (उत्तर बस्तर)

कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट:कांकेर में 60, अंतागढ़ में 48 तो बाकी तहसीलों में 25 से 35 प्रतिशत फसलों को नुकसान

  • जिले में 44 % कम बारिश, धान, मक्का, दलहन-तिलहन को हुई क्षति

जिले में इस साल अब तक की स्थिति में औसत के मुकाबले मात्र 56 प्रतिशत ही बारिश हुई है। इसमें भी दो तहसीलों कांकेर तथा दुर्गूकोंदल में तो औसत के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। किसान पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की लगातार मांग कर रहे हैं। कृषि विभाग की प्रारंभिक सर्वे रिर्पोट भी आ चुकी है जिसके अनुसार सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान कांकेर तहसील के किसानों को हो रहा है।

अंतागढ़ तहसील में यह नुकसान 48 प्रतिशत जबकि चारामा तहसील में 35 तो दुर्गूकोंदल तहसील में 34 प्रतिशत तक हो रहा है। शेष तीन तहसीलों नरहरपुर, भानुप्रतापपुर और कोयलीबेड़ा में 25 से 30 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान का आंकलन है। कृषि विभाग ने अपने सर्वे में पाया कि कमजोर और खंड वर्षा के कारण खेतों में खरपतवार उग गए हैं। अधिकतर खेतों में धान फसल से खरपतवार दिख रहे हैं। फसल में ग्रोथ नहीं आ पा रही है।

जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं उनके खेतों में धान फसल सूखने लगी है। जून, जुलाई के बाद अगस्त भी सूखा ही बीत गया। जिले में जो 56 प्रतिशत बारिश हुई भी है तो वह खंड वर्षा है। किसी गांव में बारिश होती थी तो पड़ोस के गांव में सूखा रहता था। पिछले 10 सालों के औसत की बात करें तो अब तक जिले में 1562 मिमी बारिश होनी थी लेकिन इस साल अब तक की स्थिति में मात्र 724 मिमी ही बारिश हो पाई है।

नजरीय आंकलन के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान कांकेर तहसील में 50 से 60 प्रतिशत तक हुआ है। कांकेर जिले में 1005 राजस्व ग्राम हैं जिनमें खरीफ फसलों का कुल क्षेत्रफल 1 लाख 79 हजार 216 हेक्टेयर है। धान 1 लाख 64 हजार 650 हेक्टेयर में लगी थी जिसमें से 56 हजार 553 हेक्टेयर को नुकसान हुआ है।

मक्के की फसल 37 हजार 17 हेक्टेयर में लगाई गई जिसमें से 697 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। उड़द 3218 हेक्टेयर में है जिसमें से 388 हेक्टेयर उड़द फसल को नुकसान हुआ है। कोदो-कुटकी फसल बोनी 195 हेक्टेयर में की गई थी जिसमें से 30.6 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है।

फसलों के नुकसान को आप ऐसे समझें

केस 1 : खराब फसल पर हल चलवा किया नष्ट
माटवाड़ा मोदी लक्ष्मण शोरी ने 2 एकड़ में धान फसल लगा जुलाई माह में बोनी की थी। बारिश के अभाव में फसल सूख गई। दोबारा प्रयास कर रोपा लगाया लेकिन यह भी कारगर नहीं हुआ। खेतों में घास फूस व अनुपयोगी झाड़ियां उगने लगी तो परेशान होकर खेत में हल चलवा दिया ताकि रबी में दूसरी फसल ले सकें।

केस 2 : रोपा ही नहीं लग पाया, अब खाली पड़े हैं खेत
ग्राम पुसावंड के किसान बुध्दुराम निषाद 2 एकड़ खेत में रोपा लगाने तैयारी में थे। कमजोर बारिश की वजह से नहीं लगा पाए। 2 एकड़ खेत इस बार खाली पड़ा है कोई फसल ही नहीं ले पाए। माटवाड़ा मोदी के संदीप यादव ने कहा जिन किसानों के पास सिंचाई साधन नहीं हैं उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है।

केस 3 : बोनी करने के बाद पानी के बिना खेत को खाली छोड़ना पड़ा
ग्राम पुसावंड के किसान शेखर साहू ने कहा कि अब अच्छी बारिश होती भी है तो कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि कमजोर बारिश की वजह से बोनी, रोपा, बियासी नहीं कर पाए हैं। रोपा लगाने तैयारी की थी लेकिन बारिश नहीं होने से खेत को खाली छोड़ दी, कोई फसल नहीं ली।

देर से रोपा लगा, बियासी नहीं हो पाई
गिरादवरी सर्वे के दौरान 15 दिन तक नजरीय आंकलन भी किया गया जिसमें कृषि विभाग के साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल थे। किसानों से बातचीत के आधार खरीफ फसल की क्षति की रिर्पोट बनाई गई। कृषि विभाग के अनुसार कम बारिश की वजह से रोपा काफी देर से लगा वहीं बियासी नहीं हो पाई।

25 से 30% फसल उत्पादन पर असर
कृषि उपसंचालक नरेंद्र नागेश ने कहा कमजोर बारिश से 25 से 30 प्रतिशत धान फसल उत्पादन में कमी आएगी। यह रिपोर्ट गिरादवरी सर्वे के दौरान नजरीय आंकलन के आधार पर तैयार की गई है।

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