गड़बड़ी का मामला:दूसरे जिले का बताकर भूमिहीनों और बच्चों को दिलाई किसान सम्मान निधि

- जो योग्य नहीं उनका भी नाम पोर्टल में जोड़कर ठगों ने ले लिए दो-दो हजार
- सरकार ने वसूली शुरू की तो किसानों को हुआ ठगी का अहसास
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। बदमाशों ने गांवों में एजेंट बनाकर घर-घर संपर्क किया और अयोग्य लोगों को भी योजना का बेजा लाभ दिलाया। इसके बदले में उन्होंने हर एक से दो-दो हजार रुपए लिए। गड़बड़ी का पता चलने पर जब सरकार ने अयोग्य लोगों से वसूली का आदेश दिया तो किसानों को ठगी का अहसास हुआ और अब वे कार्रवाई की मांग को लेकर अफसरों के चक्कर काट रहे है।
ऐसे ही एक मामले में रायगढ़ ब्लाक के तरकेला निवासी 25 किसान शुक्रवार को एसपी से शिकायत करने पहुंचे और बालमगोडा निवासी धरमवीर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि उसने गांव में बच्चों के नाम कोई खेत नहीं है। उनका भी पंजीयन कराके उन्हें योजना का लाभ दिलाया। गांवों के राजेश्वरी सिदार ने बताया कि पहले भी जूटमिल थाने में शिकायत की थी, जिसमें गांव के प्रकाश दास महंत को एजेंट बनाए जाने की जानकारी दी थी। सिदार ने कहा कि रैकेट में शामिल लोगों ने गांवों के लोगों से फार्म भरवाया, फिर बाद में पैसे वसूली भी की। इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर वे शुक्रवार को एसपी से शिकायत करने पहुंचे। गांवों वालों ने आरोप लगाया कि किसानों का आधार नंबर, मोबाइल, बैंक खाता नंबर ताे सही लिया गया, लेकिन गांव का नाम महासमुंद बताया गया।
योजना में हर वर्ष तीन किस्त में होता है भुगतान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 4.9 एकड़ से कम भूमि हो 6 हजार रुपए प्रति वर्ष हर पात्र किसान को तीन किस्तों में भुगतान किया जाता है। सहायता राशि सीधे बैंक खातों में जमा होती है। हर 4 महीने में तीन बार 2 हजार रुपए की सहायता राशि आती है। तीन महीने पहले गांव में फार्म भरवाने के बाद पिछले महीने इसकी राशि आनी शुरू हो गई। इसमें अब वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
इसलिए कृषि विभाग के कर्मियों पर शक
कृषि सम्मान निधि में किसानों को रजिस्ट्रेशन पहले राजस्व विभाग के माध्यम से होता था। इसमें गड़बड़ी सामने आने के बाद यह काम कृषि विभाग को सौंप दिया गया। अब किसान आधार कार्ड, जमीन का रिकार्ड, बैंक पासबुक, 2 फोटो के साथ कृषि विस्तार अधिकारी के पास जाता है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा सत्यापन करने के बाद पोर्टल पर वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी ऑनलाइन मंजूरी देता है। कृषि विभाग के पीएम किसान निधि के नोडल अधिकारी पीके सराफ ने बताया कि रैकेट से जुड़े लोगों का संबंध महासमुंद, गरियाबंद, जांजगीर के कृषि अधिकारियों से हो सकता है।
शिकायत मिलने पर कृषि विभाग को सौंपा था काम
पहले किसानों को रजिस्ट्रेशन सीएचसी में होता था। फार्म भरने से कई तरह गड़बड़िया सामने आने पर पिछले वर्ष कलेक्टर भीम सिंह ने राज्य सरकार को इस व्यवस्था बदलने के लिए पत्र लिखा था। इस पर रजिस्ट्रेशन का काम कृषि विभाग को सौंप दिया, लेकिन अब कृषि विभाग की कर्मियों की मिलीभगत से एेसी गड़बड़ी फिर सामने आ रही है।
26 हजार किसानों से हो रही है वसूली
इस स्कीम में अब तक 2 लाख 26 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। ऐसे किसान जो आईटी रिटर्न दाखिल करते हैं या जिनके खाते में राशि ज्यादा है। ऐसे किसानों के नाम काटकर उनसे योजना में ली गई रकम की वसूली के निर्देश केन्द्र सरकार ने दिए हैं। ऐसे में करीब 26093 किसानों 11 करोड़ 71 लाख 94 हजार रुपए की वसूली की जानी है, पर कृषि विभाग अब तक सिर्फ 158 किसानों से 8 लाख 38 हजार रुपए की ही वसूली कर पाया है। वसूली के लिए अब तक 3290 किसानों को नोटिस भेज चुके हैं।
पुलिस मामले में जांच करेगी, कार्रवाई भी होगी
विभाग के पास शिकायत आई है। यह पूरा मामला पुलिस से जुड़ा है। इसमें जो भी सहयोग की जरूरत होगी, हम करेंगे। यह पूरा मामला हेराफेरी का लगता है, इसलिए इसमें कार्रवाई भी पुलिस करेगी।
-ललित मोहन भगत, उपसंचालक, कृषि विभाग



