दन्तेवाड़ा जिला

हार गया नेटवर्क, जीत गया जज्बा:मेटापाल स्वास्थ्य केंद्र की छत में आधी रात तक बैठ स्वास्थ्य कर्मी बनाते हैं आयुष्मान कार्ड, लाइट गुल होने की वजह से टॉर्च की रोशनी से करते हैं काम

दंतेवाड़ा जिले के नक्सल प्रभावित मेटापाल गांव में नेटवर्क नहीं रहता। गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों को ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बनाने काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। दिनभर मरीजों का इलाज करते हैं, फिर शाम के 100 मीटर दूर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की छत में आधी रात तक बैठ आयुष्मान कार्ड बनाने का काम करते हैं। लेकिन चुनौती यहां भी खत्म नहीं होती। एक तरफ छत में जहां थोड़ा बहुत नेटवर्क पकड़ता है तो वहीं यहां बिजली गुल होने की सबसे बड़ी समस्या भी है। ऐसे में अंधेरी रात में कर्मचारी टॉर्च की रोशनी से काम करते हैं।

स्टाफ नर्स सरस्वती डेगल खुद के लैपटॉप का उपयोग कर आयुष्मान कार्ड बनाने का काम भी कर रही है।
स्टाफ नर्स सरस्वती डेगल खुद के लैपटॉप का उपयोग कर आयुष्मान कार्ड बनाने का काम भी कर रही है।

इलाज के साथ ग्रामीणों की जुटाते हैं जानकारी, रात में पोर्टल में करते हैं अपलोड
दरअसल, मेटापाल में कार्यरत स्टाफ नर्स सरस्वती डेगल अपनी नर्सिंग की जिम्मेदारी के अलावा खुद के लैपटॉप का उपयोग कर आयुष्मान कार्ड बनाने का काम भी कर रही है। उनके इस काम में मेटापाल प्रभारी डॉ पुष्पेंद्र साहू, RMA अनीता वट्टी, स्टाफ नर्स गीता कुंजाम भी पूरी मदद करते हैं। इस दस बिस्तर वाले अस्पताल में दिन भर मरीजों को इलाज देने के बाद शाम के समय स्टाफ नर्स सरस्वती उपस्वास्थ्य केंद्र की छत पर जाकर मरीजों की पूरी जानकारी केस शीट व सम्बंधित दस्तावेज आयुष्मान के TMS पोर्टल पर अपलोड करती है।

स्वास्थ्य कर्मियों ने अब तक मेटापाल के 120 से ज्यादा लोगों का आयुष्मान कार्ड बना दिया है।
स्वास्थ्य कर्मियों ने अब तक मेटापाल के 120 से ज्यादा लोगों का आयुष्मान कार्ड बना दिया है।

इस दौरान अस्पताल के बाकि स्टाफ भी उनकी मदद करने पीछे नहीं हटते हैं। जिसका परिणाम यह है कि नक्सल प्रभावित इस गांव के ग्रामीण आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना से जुड़ रहे हैं। ग्रामीण सोनधर, रमेश, प्रफुल, मालती व राजमती सहित अन्य ने बताया कि उनका आयुष्मान कार्ड बन गया है। ऐसे में अब वे सरकार की योजनाओं का लाभ लें कर मुफ्त में इलाज करवा सकते हैं। स्वास्थ्य कर्मियों ने अब तक मेटापाल के 120 से ज्यादा लोगों का आयुष्मान कार्ड बना दिया है।

जिले के अन्य गांवो में भी स्वास्थ्य कर्मी आयुष्मान कार्ड बनाने कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
जिले के अन्य गांवो में भी स्वास्थ्य कर्मी आयुष्मान कार्ड बनाने कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

नेटवर्क वाले पीछे, बिना नेटवर्क के भी आगे
जिले में ऐसे भी सेंटर हैं जहां नेटवर्क उपलब्ध है फिर भी वहां योजना से लाभ दिला पाने में संस्था में कार्यरत कर्मी पिछड़ रहे हैं। वहीं नक्सल प्रभावित गांव मेटापाल में स्वास्थ्य कर्मियों का जज्बा ही है कि अब तक 80 फीसदी से ज्यादा मरीजों का उपचार आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पूरी तरह से मुफ्त में हो रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने कहा कि, इस योजना के संचालन में दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी का पूरा मार्गदर्शन मिलता है। साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थय अधिकारी , सिविल सर्जन समेत पूरा स्वास्थ महकमा भी योजना का ग्रामीणों को लाभ दिलाने में पूरा जोर लगा रहे हैं।

दंतेवाड़ा जिले में अब तक 108515 लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है।
दंतेवाड़ा जिले में अब तक 108515 लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है।

1 लाख से ज्यादा लोगों का बन गया आयुष्मान कार्ड
नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में आयुष्मान भारत योजना से हितग्राहियो को जोड़ना और फिर मरीजों को योजना के माध्यम से मुफ्त में इलाज की सुविधा दिलाना अपने आप में एक चुनौती भरा कार्य है। जिले के अंदरूनी इलाकों के ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बनाना और शासकीय अस्पतालों में योजना के माध्यम से उन्हें मुफ्त उपचार दिलाने का काम अब जोर पकड़ चूका है। आयुष्मान भारत के जिला परियोजना समन्वयक राज देवांगन ने बताया कि, दंतेवाड़ा जिले में अब तक 108515 लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है।

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