जिला अस्पताल में कोरोना तैयारियों की खुली पोल

डॉ मुखर्जी नींद है जानिए क्या बात है
जिला प्रशासन को संज्ञान में लेने की आवश्यकता
CG09 NEWS CHIEF EDITOR BASANT NAMDEV

कवर्धा:- कोविड 19 (कोरोना) जैसे वैश्विक महामारी के दौरान जिला अस्पताल कवर्धा में कोरेंटाइन मरीजों के ईलाज में गम्भीर लापरवाही का मामला सामने आया है। दरअसल बाहर राज्यों , जिलों अथवा विदेश से आने वाले व्यक्तियों में कोरेना संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए इन्हें 14 दिन कोरेंटाइन में सुरक्षित तरीके से रखा गया है, इनके ईलाज के लिए शासन ने दिशा-निर्देश भी जारी किया है, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोरोना संदिग्धों का उपचार करने के लिए अलग वार्ड अथवा कक्ष की व्यवस्था किया जाए। इस सम्बंध में जिला कलेक्टर अवनीश कुमार शरण द्वारा भी स्पष्ट निर्देश दिया जा चुका है बावजूद इसके जिला अस्पताल कबीरधाम में उक्त निर्देश की अवहेलना करते हुए कोरेटाइन सेंटर से आई गर्भवती महिला को अन्य प्रसूताओं के साथ जनरल वार्ड में भर्ती रखा गया है। दरअसल विकास खण्ड सहसपुर लोहारा के ग्राम गांगपुर में तेलंगाना राज्य से आये प्रवासी मजदूरों में से गर्भवती महिला को बीते रात प्रसव पीड़ा होने पर रवि राजपूत जनपद सदस्य द्वारा कवर्धा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महिला का कोरेना जॉच के लिए सेम्पल रायपुर भेजा गया है। जहाँ से उनका जांच रिपोर्ट आना बाकी है। ऐसे में उक्त महिला को अन्य मरीजों के साथ एक वार्ड में भर्ती रखने से अन्य मरीजो के भी संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। इस घटना ने कोरेना से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन पोल खोलकर रख दी है। उल्लेखनीय है कि सिविल सर्जन सुजॉय मुखर्जी द्वारा किसी का फोन नही उठाना और जवाब नही देना उनके कार्य सैली पर प्रशन चिन्ह है ऐसे व्यक्ति किसी का मोबाइल अटेंड नही कर सकता तो सम्पूर्ण जिले के सौपे कार्यो को पूर्ण निष्ठा से कैसे सम्पादन कर सकता है हाल ही में इनके और स्टाप के सम्बंध में अन बन बना हुआ जैसे खबरे भी समाचार में प्रकाशित भी हुआ है जिला प्रशासन इस विषय को संज्ञान में लेते हुए ऐसे अधिकारी पर सख्त कार्यवाही करने की आवश्यकता है सदैव बैठकों में यह जानकारी दी जाती रही है कि कोरोना से निपटने के लिए जिला अस्पताल में सभी आवश्यक तैयारियां शासन के दिशा- निर्देशानुसार किया जा चुका है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही देखने को मिल रही है। इस सम्बंध में सीएस डॉ मुखर्जी से बात करने के लिए मोबाइल से सम्पर्क भी किया गया लेकिन उनको मोबाइल उठा कर समस्या,सुझाव,या शिकायत सुनने को आवश्यक नही समझता जबकि जिला कलेक्टर के द्वारा सख्त निर्देश भी दिया गया हैं कि अपरचित नम्बर से भी फोन आने पर उस फोन का उत्तर देना भी कहा गया हैं लेकिन जिलाधीश के निर्देश का धज्जिया उड़ाया जा रहा हैं।



