कोरोना से निपटने की तैयारी धीमी:सीएम ने कहा था 15 दिनों में बनाएं आरटीपीसीआर लैब हमारी तैयारी ऐसी कि चार महीने बाद भी काम अधूरा

- आरटीपीसीआर जांच के लिए अभी भी रायगढ़ और बिलासपुर के लैब के भरोसे हम
जिले में अबतक आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लैब का निर्माण नहीं हो सका है। कोरोना की दूसरी लहर से पहले मार्च के दूसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर आरटीपीसीआर लैब तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए राज्य शासन ने ढाई करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी लैब शुरू नहीं हो सका है। यही वजह है कि सही समय पर संक्रमित व्यक्ति की पहचान नहीं होने के कारण समय पर उनका इलाज शुरू नहीं हो पाता जिसके कारण बीमारी को नुकसान हो जाता है।
जिले में अभी तक ट्रे नेट व एंटीजन से ही टेस्ट हो रहा है। आरटीपीसीआर के लिए सैंपल लेकर जांच करने रायगढ़ व बिलासपुर भेजा जाता है। इससे रिपोर्ट आने में सप्ताह भर का समय लग जाता है। इस समस्या को देखते हुए जिले में आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लैब शुरू करने कहा गया था ताकि तीसरी लहर यदि आ जाए तो जांच जल्दी हो और रिपोर्ट समय पर मिल सके। काम में देरी न हो इसके लिए पुराने जिला अस्पताल की बिल्डिंग को ही दुरूस्त कर वायरोलॉजी लैब शुरू करने का प्लान किया गया। भवन के मरम्मत की जिम्मेदारी बिलासपुर के ठेकेदार विकास शुक्ला को दी गई।
ठेकेदार ने सिविल का काम तीन महीने में 80 प्रतिशत पूरा कर दिया,लेकिन जरूरी उपकरणों की खरीदी में देरी के कारण इसकी शुरुआत समय अब तक नहीं हो सकी है। वायरोलॉजी लैब में जरूरी आरटीपीसीआर और टैंपलेट मशीन के लिए तीन माह की देरी से जून के आखिर में टेंडर किया है। अबतक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इंजीनियरों से मिली जानकारी के अनुसार अभी उपकरण आने में और समय लगेगा। ऐसे में अगस्त में भी लैब से सैंपलों की आरटीपीसीआर पद्धति से जांच नहीं हो सकेगी। अभी भी जिले के संदिग्ध कोरोना मरीजों के सैंपल बिलासपुर सिम्स और रायगढ़ मेडिकल कॉलेज ही भेजे जाएंगे।
मरीज अधिक होने पर सैंपल नहीं लेते बाहरी लैब वाले
कोरोना संक्रमण पीक पर पहुंचने के बाद रायगढ़ मेडिकल कॉलेज ने अपने जिले को पहली प्राथमिकता में रखते हुए जांजगीर के आने वाले सैंपलों की जांच से इंकार कर दिया था। इसके बाद जिले के सभी सैंपल बिलासपुर भेजे जा रहे हैं। बिलासपुर से भी सैंपलों के रिजल्ट आने में 3 से 7 दिनों का समय लग रहा था, हालांकि वर्तमान में सैंपलों की संख्या कम होने के कारण 3 दिनों में रिजल्ट बिलासपुर और रायगढ़ से भेजी जा रही है।
वायरोलॉजी लैब जरूरी
वर्तमान में कोरोना की पहचान के लिए तीन तरह की जांच प्रक्रिया जिलों में अपनाई जा रही है। सबसे पहले संदिग्ध मरीजों का रैपिड एंटीजन टेस्ट है। चिकित्सक इस प्रक्रिया पर 40% तक भरोसा करते हैं। दूसरा ट्रू-नॉट से इस प्रक्रिया में 70 प्रतिशत और तीसरी प्रक्रिया आरटीपीसीआर पद्धति है। इसके परिणाम 80 से 90 प्रतिशत तक सटीक माने जाते हैं। यही वजह है कि सभी जिलों में एक-एक कर लैब की स्थापना की जा रही है।
मरम्मत में 29 लाख, बाकी पैसे उपकरणों पर होंगे खर्च
वायरोलॉजी लैब के लिए 2.5 करोड़ रुपए की मंजूरी शासन से मिली है। इस 29 लाख रुपए पुराने भवन की मरम्मत व सिविल संबंधी कार्य पर खर्च किए जा रहे हैं। शेष पूरी राशि लैब में लगाए जाने वाले उपकरणों पर खर्च होंगे। अब तक लैब में तापमान मेंटेन रखने के लिए सेंट्रल डक्टिंग कूलिंग सिस्टम, हीटर और सैंपल स्टोरेज से संबंधित उपकरण इंस्टॉल किए गए हैं। कुछ उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया रायपुर सीजीएमएससी द्वारा की जा रही है।
बीते 4 महीने में 676 मौतें
जिले में 3 अप्रैल तक संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या महज 381 थी, जो 12 अगस्त तक 1057 तक पहुंच गई है। यानी कोरोना की दूसरी लहर में मरने वालों की कुल संख्या 676 है। मरने वालों में कई ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनकी रिपोर्ट रैपिड एंटीजन में निगेटिव और आरटीपीसीआर में पॉजीटिव आई है। आरटीपीसीआर की रिपोर्ट देर से आने के कारण चेस्ट में संक्रमण का दर बढ़ा और उनकी मौतें हुई थी।
जिम्मेदार अफसर कर रहे बचने का प्रयास
वायरोलॉजी लैब के निर्माण में हो रही देरी के संबंध में सीएमएचओ डॉ. एसआर बंजारे ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से बात करने कहा। वहीं सिविल सर्जन डॉ. अनिल जगत का कहना है कि सीएमएचओ ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं। उन्होंने विलंब के पीछे मशीनों के इंस्टालेशन व कर्मचारियों की व्यवस्था को कारण बताया।
30 प्रतिशत काम करना अभी भी शेष
वायारोलॉजी लैब का काम लगभग 70 फीसदी पूरा हो चुका है। दो मशीनों के लिए रायपुर स्तर पर टेंडर हुआ है। सिविल का थोड़ा काम बााकी है। जो हम जल्द पूरा कर लेंगे। टैंपलेट और आरटीपीसीआर मशीनों का इंस्टालेशन खरीदी के बाद ही हो सकेगा।
-रूश्यंत महिलांगे, सिविल इंजीनियर सीजीएमएससी



