मृतक की पत्नी का आरोप:एजेंट की धमकी- 30 हजार कर्ज नहीं चुकाया तो निकलवा लेंगे किडनी, युवक ने लगाई फांसी

- माइक्रो फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट ने दी थी गालियां और धमकी, इससे पति थे दुखी थे, इसलिए उन्होंने दे दी जान
- बलरामपुर के चलगली थाना क्षेत्र का मामला
बलरामपुर जिला के चलगली थाना इलाके के एक युवक ने फांसी लगाकर इसलिए जान दे दी, क्योंकि उसने माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 30 हजार का लोन लिया था और उसकी एक किश्त लाॅकडाउन के समय जमा नहीं कर पाया था। इसके कारण कंपनी से पहुंचे रिकवरी कर्मचारियों ने जलील करने वाली गलियां दी और धमकी दी था कि कर्ज नहीं पटाया तो वे उसकी किडनी निकलवा कर बेंच देंगे और कर्जा वसूल कर लेंगे।
इसके बाद युवक ने इसकी जानकारी अपनी पत्नी को दी और रात में घर के अंदर फांसी लगाकर जान दे दी। मंगलवार देर रात चलगली थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत धनवार कला निवासी युवक जीरोधन काशी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पत्नी ने बताया कि उन्होंने प्रतापपुर के ग्राम शक्ति समूह के माध्यम से एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 30 हजार कर्ज लिए थे। वे लगातार हर माह किस्त पटाते थे, लेकिन लाॅकडाउन के कारण कमाई नहीं हुई तो जुलाई में किश्त नहीं पटा सके थे। कंपनी के लोग मंगलवार को आए थे और वे गाली-गलौज कर बोल रहे थे कि तुम्हें कुछ भी करके पैसा देना ही पड़ेगा, भले तुम घर-जमीन बेचकर दो या तो तुम अपनी किडनी बेचकर दो, लेकिन तुम्हें पैसा जमा करना ही पड़ेगा। इन सब बात को सुनकर वह काफी परेशान था और उसी दिन रात 8 बजे पत्नी पड़ोस में गई थी, तभी उसने जान दे दी। उसने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर फांसी लगा लिया था। दरवाजा तोड़कर अंदर गए तो वह फांसी में लटका था। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई और पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है।
कई लोगों ने लिया है कर्ज कंपनी के लोग देते हैं गालियां
गांव के सरपंच ने बताया कि उनकी पंचायत सहित दूसरी पंचायत के सैकड़ों लोग माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेकर फंस गए हैं और कर्ज नहीं पटा पा रहे हैं। इसके कारण कंपनी के कर्मचारी आए दिन लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहते हैं। जिस युवक ने रात में आत्महत्या की उससे भी गाली-गलौज की गई थी। बता दें कि पुलिस ने इन्हीं बिन्दुओं पर जांच शुरू कर दी है।
कर्ज के पैसे से खरीद ली थी बाइक, मरने से पहले पत्नी को बोला था- कैसे चुकाएंगे
मृतक की पत्नी ने बताया कि उन्होंने दो कंपनियों से 30 और 40 हजार कुल 70 हजार कर्ज लिया था, लेकिन उनके हाथ में क्रमशः 38 और 27 हजार मिला था और बाकी पैसा बीमा के नाम पर काट लिया गया था। बताया गया था कि उनका बीमा रहेगा और दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उन्हें कर्ज नहीं पटाना पड़ेगा। उन्होंने कर्ज के पैसे से 60 हजार रुपए जमा कर बाइक खरीद ली थी और बाइक का भी 20 हजार कर्ज था। वहीं गांव में आकर कंपनी के एजेंट ने धमकी दी तो उसने पत्नी को बताया था और कहा था कि अब कैसे कर्ज पटाएंगे।



