कबीरधाम विशेष

कीचड़ में फंसे दो हाइवा:रेंगाखार-लोहारा रोड 13 घंटे जाम, दूसरे रास्ते से अस्पताल जाते हुए बाढ़ आई नदी ने रास्ता रोका, महिला की मौत

  • चिल्फी से रेंगाखार-साल्हेवारा सड़क निर्माण में लगे हाइवा चालकों की लापरवाही ने ली जान
  • आंदोलन की चेतावनी: आदिवासी है मृतका, नाराज ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

रेंगाखार जंगल से सहसपुर लोहारा जाने वाली सड़क पर कीचड़ में दो हाइवा फंसे थे, जिसके चलते बुधवार रात 13 घंटे तक ट्रैफिक जाम लगा रहा। इस बीच एक बीमार आदिवासी महिला को अस्पताल ले जा रहा वाहन भी ट्रैफिक जाम में फंस गया। दूसरे रास्ते से अस्पताल जाते हुए बाढ़ आई नदी ने रास्ता रोका। नदी का जलस्तर घटने के इंतजार में मरीज की हालत बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को रेंगाखार- लोहारा राेड पर चक्काजाम कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि चिल्फी से रेंगाखार-साल्हेवारा सड़क निर्माण में लगे हाइवा चालकों की लापरवाही से आदिवासी महिला की मौत हुई। बताया कि बुधवार सुबह 11 बजे चालकों की लापरवाही से दो हाइवा एक साथ कीचड़ में फंस गए, जिसके करण ट्रैफिक जाम हो गया। इसी दौरान ग्राम तेंदूटोला निवासी बिंदा बाई (42) को इलाज के लिए कवर्धा ले जा रहे थे। तभी जाम के कारण मरीज को दूसरे रास्ते से कवर्धा ले जा रहे थे। पंडरीपानी से तेलीटोला के बीच नदी में बाढ़ आई थी।

पानी कम होने का इंतजार करते
करते देर हो गई और इलाज से पहले ही उसकी मौत हो गई। मृतका बिंदा बाई ग्राम पंचायत खम्हरिया में पंच थीं। इधर ग्रामीणों ने सड़क मरम्मत न होने व भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक न लगाए जाने पर उग्र आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है।

यहां पर रोज 20 हाइवा टनों वजन लेकर फर्राटे भर रहे
ग्रामीणों की मानें, तो रेंगाखार से लोहारा होते हुए जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए यही एकमात्र सड़क बची है। क्षेत्र की 95% आबादी इस से आवागमन करती है। लेकिन सड़क निर्माण में लगे 20 से 22 हाइवा व टिप्पर वाहन रोज 35 से 40 टन वजन लेकर इस सड़क पर फर्राटे भरते हैं, जिससे यह सड़क खराब हो गई है। बता दें कि रेंगाखार से चिल्फी जाने वाली सड़क बहुत अधिक खराब है, उस रास्ते से आवागमन पूरी तरह बंद है। वहीं अभयारण्य क्षेत्र मांदा घाट के रास्ते कई छोटे बरसाती नाले पड़ते हैं। बारिश के कारण इस पर भी आना- जाना बंद है। वहीं गंडई (राजनांदगांव) के रास्ते कवर्धा पहुंचने में करीब 120 किलोमीटर लगता है।

सड़क की मरम्मत कराएं
चक्काजाम कर रहे ग्रामीणों ने रेंगाखार से लोहारा पहुंच मार्ग की तत्काल मरम्मत कराने और इस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की। नहीं तो आगे आंदोलन करेंगे। आक्रोशित ग्रामीणों ने करीब 2 घंटे तक चक्काजाम किया। इसके बाद कलेक्टर के नाम तहसीलदार सीताराम कंवर को ज्ञापन सौंपा।

भूमिपूजन करने के 4 साल बाद भी नहीं बनी चिल्फी से साल्हेवारा तक की सड़क
चिल्फी से रेंगाखार होते हुए नचनिया बॉर्डर (साल्हेवारा) तक 60.80 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होना है। 204.33 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह सड़क 4 साल बाद भी नहीं बन सकी। जबकि इस बीच सरकार और ठेकेदार दोनों बदल गए हैं। पूर्व में इस सड़क का ठेका छग रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीआरडीसी) ने दिल्ली की जीडीएसएल कंपनी को दिया था। उक्त कंपनी खुद काम न करते हुए एसएसबीएम जशपुर, औरा कंपनी इंदौर, विनायक कंस्ट्रक्शन दुर्ग से काम ले रहा था। साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने भूमिपूजन कर सड़क निर्माण की नींव रखी थी। 24 फीट चौड़ी इस सड़क को ऐसा बनाया जाना था, जिससे रास्ते में पड़ने वाले भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र के वन्यजीवों को समस्या न हो। टेंडरिंग कंपनी ने सुस्ती के चलते सड़क का यह हाल है।

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