सी.वी रमन यूनिवर्सिटी के खिलाफ याचिका:गलत तरीके से डिग्री बांटने का आरोप, कोर्ट ने कहा 4 हफ्ते में जवाब पेश ना करने पर पक्षकारों को देना होगा 1-1 लाख रुपए, 11 लोगों को बनाया गया पक्षकार

अनियमितताओं को लेकर सी.वी रमन यूनिवर्सिटी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर 4 हफ्ते में पक्षकार अपना जवाब पेश नहीं करते हैं तो उन्हें याचिकाकर्ता को 1-1 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने होंगे। याचिकाकर्ता ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन के 11 अलग – अलग पदाधिकारियों को पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई अब 20 सितंबर को रखी गई है। पूरे मामले की सुनवाई एक्टिंग सीजे प्रशांत मिश्रा और रजनी दुबे की डिवीजन बेंच में हुई।

बिलासपुर की रहने वाली आरती सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सी.वी रमन यूनिवर्सिटी पर गलत तरीके से डिग्री बांटने का आरोप लगाया है। आरती सिंह के वकील रोहित शर्मा ने कहा की यूनिवर्सिटी ने बिना शासन से उचित अनुमति लिए अलग-अलग तरह के कोर्स संचालित किए और उनकी डिग्रियां छात्र-छात्राओं को बांट दी। रोहित शर्मा ने आगे कहा की यूनिवर्सिटी ने गलत तरीके से मृत लोगों को भी डिग्रियां बांट दी। उन्होंने बताया कि बिना विश्वविद्यालय नियामक आयोग, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की अनुमति लिए ही यूनिवर्सिटी ने देश के अलग अलग कोने में सेंटर संचालित किए। इन मुद्दों को लेकर आरती सिंह ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ याचिका दायर की है। दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके इसके लिए उन्होंने अदालत से पूरे मामले को CBI के हाथ में सौंपने की मांग उठाई है।



